Post Viewership from Post Date to 13-Nov-2020 32nd Day
City Subscribers (FB+App) Website (Direct+Google) Email Instagram Total
1852 525 0 0 2377

***Scroll down to the bottom of the page for above post viewership metric definitions

एर्गोनॉमिक्स के हैं अनेकों फायदे

लखनऊ

 12-10-2020 02:01 AM
घर- आन्तरिक साज सज्जा, कुर्सियाँ तथा दरियाँ

पहले के समय में मानव अत्यधिक श्रम तो करता था लेकिन उसके पास ऐसे उपकरण मौजूद नहीं थे, जो उसे कार्य करने में सहायता प्रदान करें और उसके कार्य की उत्पादकता को बढाएं। वर्तमान समय में कार्य करने हेतु ऐसे कई उपकरण या साधन उपलब्ध हैं, जो मानव श्रम को आरामदायक तो बनाते ही हैं, साथ ही उसकी उत्पादकता को भी बढ़ाते हैं। इसे मुख्य रूप से श्रमदक्षता शास्त्र या एर्गोनॉमिक्स (Ergonomics) के माध्यम से समझा जा सकता है। एर्गोनॉमिक्स कार्यकर्ताओं को स्वस्थ रखने के लिए नौकरी को डिजाइन (Design) करना है, ताकि उनके द्वारा किया जाने वाला काम अधिक सुरक्षित और अधिक कुशल हो।
एर्गोनोमिक उपकरणों या समाधानों को लागू करने से कर्मचारियों को अधिक आरामदायक परिस्थितियां प्राप्त होती हैं और उनकी उत्पादकता में वृद्धि हो सकती है। 5 दशक से भी अधिक समय पहले, ऐसा माना जाता था कि भारतीय एर्गोनॉमिक्स की उत्पत्ति आमतौर पर प्रेसिडेंसी कॉलेज (Presidency College), कोलकाता के फिज़ियोलॉजी (Physiology) विभाग में हुई थी। पिछले पांच दशकों में भारत में एर्गोनॉमिक्स के अनुसंधान ने निम्नलिखित मुख्य क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया है:
• शारीरिक कार्य क्षमता, विभिन्न व्यवसायों का कार्य तनाव।
• इस क्षेत्र के लोगों के विविध मानवमिति (Anthropometry)।
• भार वहन - मुख्य रूप से असंगठित क्षेत्र में।
• प्रतिकूल वातावरण में काम की परिस्थितियों में सुधार, जिसमें गर्म और आर्द्र वातावरण शामिल हैं।
• कृषि के कुछ पहलू (जिस पर अधिकांश ग्रामीण लोग अभी भी निर्भर हैं)।
• कुछ पारंपरिक और असंगठित क्षेत्रों के लिए कम लागत में सुधार।
• उत्पाद डिजाइन।
• इलेक्ट्रॉनिक्स (Electronics) और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र।
इन क्षेत्रों में विभिन्न संस्थानों के माध्यम से एर्गोनॉमिक्स अनुसंधान, शिक्षण और अभ्यास शुरू किए गए थे। 60 के दशक की शुरुआत में, श्रम मंत्रालय भारत सरकार के तहत केंद्रीय श्रम संस्थान, मुंबई के औद्योगिक फिजियोलॉजी विभाग ने नौकरियों के तनाव को वर्गीकृत करने और निर्धारित मानक विधियों का नाम देने के लिए विभिन्न व्यवसायों के कार्य भार का मूल्यांकन किया। भारतीय औद्योगिक श्रमिकों के लिए एक स्वीकार्य कार्य भार भी परिभाषित किया गया और भारतीय जनसंख्या के मानव विज्ञान का भी विस्तार से अध्ययन किया गया। केंद्रीय खनन अनुसंधान केंद्र, धनबाद में लगभग एक ही समय में इसी तरह के अध्ययन शुरू किए गए थे।
एर्गोनॉमिक्स को 'मानव कारक' भी कहा जाता है, जिसका लक्ष्य मानव त्रुटि को कम करना, उत्पादकता में वृद्धि करना, और मानव तथा वस्तुओं (मेज, कंप्यूटर, कुर्सी) के बीच परस्पर क्रिया पर विशेष ध्यान देने के साथ सुरक्षा और आराम को बढ़ाना है। यह क्षेत्र कई विषयों, जैसे मनोविज्ञान, समाजशास्त्र, अभियांत्रिकी, बायोमैकेनिक्स (Biomechanics), औद्योगिक डिजाइन, शरीर विज्ञान, मानव विज्ञान, विज़ुअल (Visual) डिज़ाइन, उपयोगकर्ता अनुभव और उपयोगकर्ता इंटरफ़ेस (User Interface) डिज़ाइन का संयोजन है। शोध में, मानव कारक मानव व्यवहार का अध्ययन करने के लिए वैज्ञानिक पद्धति को नियोजित करते हैं ताकि परिणामी आंकड़ों को प्राथमिक लक्ष्यों पर लागू किया जा सके। संक्षेप में, यह डिजाइनिंग उपकरण, उपकरणों और प्रक्रियाओं का अध्ययन है, जो मानव शरीर और इसकी संज्ञानात्मक क्षमताओं को बेहतर बनाते हैं। तनावपूर्ण काम के वातावरण में, एर्गोनोमिक सीटिंग (Seating) केवल एक आरामदायक साधन ही नहीं बल्कि एक आवश्यकता भी है। ऐसा इसलिए है क्योंकि कार्यालय, सरकार, सैन्य, परिवहन, कानून प्रवर्तन या अन्य वातावरण की मांग लंबे समय तक बैठने की होती है तथा ऐसे में कर्मचारी विशिष्ट चुनौतियों का सामना करते हैं, जिन्हें एर्गोनोमिक कुर्सियों द्वारा कम किया जा सकता है। भारत में, पिछले 5 दशकों के दौरान लगभग 45% निवेश निर्माण / बुनियादी ढांचे के लिए ज़िम्मेदार है। देश की लगभग 16-18% कामकाजी आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अपने जीवनयापन के लिए विनिर्माण क्षेत्र पर निर्भर है। 3 करोड़ से अधिक लोग भारतीय निर्माण उद्योग में व्यस्त हैं, जो 200 बिलियन से अधिक की पूंजी को उत्पन्न करते हैं।
कंपनियों ने तनाव को कम करने के लिए एर्गोनॉमिक्स मानकों और प्रक्रियाओं को अधिक लचीलेपन, गलत आसन के उन्मूलन और संचालन की स्थिरता के लिए निष्पादित किया है।
परिणामस्वरूप, 1989 से 1995 तक श्रमिकों के भत्ता बीमा प्रीमियम (Premium) में 70% की गिरावट आई, जिससे 31 लाख डॉलर की बचत हुई थी। एर्गोनॉमिक्स महत्वपूर्ण है क्योंकि जब आप नौकरी कर रहे होते हैं और आपका शरीर एक गलत मुद्रा, अत्यधिक तापमान, या प्रतिकूल परिस्थिति में होता है तब आपकी मस्कुलोस्केलेटल (Musculoskeletal) प्रणाली प्रभावित होती है। यह वो स्थिति है, जब अधिक कार्य करने से आपके शरीर की मांसपेशियों, जोड़ों, नसों, स्नायुबंधन आदि प्रभावित होने लगते हैं। इस प्रभाव से शरीर में थकान, बेचैनी और दर्द जैसे लक्षण उत्पन्न होते हैं। एर्गोनॉमिक्स के कई फायदे हैं, जैसे:
• बचत में वृद्धि होती है, क्योंकि आपके शरीर की अधिक क्षति नहीं होती।
• अधिक उत्पादकता प्राप्त होती है और कर्मचारी स्थायी रहते हैं।
• एर्गोनोमिक सुधारों को लागू करने से जोखिम कारक कम हो सकते हैं जो असुविधा का कारण बनते हैं। एर्गोनोमिक सुधार मस्कुलोस्केलेटल विकारों के लिए प्राथमिक जोखिम कारकों को कम कर सकते हैं, इसलिए श्रमिक अधिक कुशल, उत्पादक होते हैं।
• श्रमिकों को अपनी नौकरी से अधिक संतुष्टि होती है।
• एर्गोनॉमिक्स पर ध्यान देने से कर्मचारियों को मूल्यवान महसूस हो सकता है क्योंकि उन्हें पता है कि उनका नियोक्ता उनके कार्यस्थल को सुरक्षित बना रहा है।
• एर्गोनॉमिक्स स्वस्थ और दर्द-मुक्त श्रमिकों का नेतृत्व करता है, जिससे उनकी श्रम संलग्न होने और उत्पादक होने की संभावना अधिक हो जाती हैं।

संदर्भ:
https://osha.oregon.gov/OSHAPubs/ergo/ergoadvantages.pdf
https://en.wikipedia.org/wiki/Human_factors_and_ergonomics
https://www.conceptseating.com/benefits-of-ergonomic-seating
https://www.nbmcw.com/tech-articles/roads-and-pavements/36186-the-consonance-of-organizational-ergonomics-in-indian-construction.html
https://www.ise.org.in/fountainhead.shtml
चित्र सन्दर्भ:
पहले चित्र में बॉडी पार्ट्स के लिए इर्गोनॉमिक्स का उपयोग करते दिखाया गया है।(WIKIPEDIA)
दूसरी छवि से पता चलता है कि लैपटॉप पर काम करने के कारण कर्मचारी असहज हो रहा है।(canva)
तीसरी छवि से पता चलता है कि घंटों तक टाइपिंग (Typing) करने के कारण कलाई में चोट लग सकती है।(canva)


***Definitions of the post viewership metrics on top of the page:
A. City Subscribers (FB + App) -This is the Total city-based unique subscribers from the Prarang Hindi FB page and the Prarang App who reached this specific post. Do note that any Prarang subscribers who visited this post from outside (Pin-Code range) the city OR did not login to their Facebook account during this time, are NOT included in this total.
B. Website (Google + Direct) -This is the Total viewership of readers who reached this post directly through their browsers and via Google search.
C. Total Viewership —This is the Sum of all Subscribers(FB+App), Website(Google+Direct), Email and Instagram who reached this Prarang post/page.
D. The Reach (Viewership) on the post is updated either on the 6th day from the day of posting or on the completion ( Day 31 or 32) of One Month from the day of posting. The numbers displayed are indicative of the cumulative count of each metric at the end of 5 DAYS or a FULL MONTH, from the day of Posting to respective hyper-local Prarang subscribers, in the city.

RECENT POST

  • जर्मप्लाज्म सैम्पलों (Sample) पर लॉकडाउन का प्रभाव
    स्तनधारी

     21-01-2021 01:41 AM


  • पहला वाहन लेने से पहले ध्यान में रखने योग्य कुछ महत्वपूर्ण बातें
    य़ातायात और व्यायाम व व्यायामशाला

     20-01-2021 11:53 AM


  • भारत की जनता की नागरिकता और उससे जुडे़ विशेष नियम
    सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान

     19-01-2021 12:32 PM


  • आदिवासी समूहों द्वारा आज भी स्वदेशी रूप में संजोयी गयी हैं, आभूषणों की प्राचीन कलाएं
    सिद्धान्त I-अवधारणा माप उपकरण (कागज/घड़ी)

     18-01-2021 12:47 PM


  • मदद करने से मिलती है खुशी
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     17-01-2021 12:14 PM


  • क्या मिक्सर ग्राइंडर से बेहतर है भारत भर में प्रचलित सिलबट्टा
    वास्तुकला 2 कार्यालय व कार्यप्रणाली

     16-01-2021 12:32 PM


  • वास्तुकला का एक बेहतरीन उदाहरण पेश करती है, लखनऊ की तारे वाली कोठी शाही वेधशाला
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     15-01-2021 12:56 AM


  • अग्नि और सूर्य देवता को समर्पित है, लोहड़ी का उत्सव
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     14-01-2021 12:15 PM


  • क्या है आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से वजन बढ़ने का कारण?
    सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान

     13-01-2021 12:15 PM


  • अर्थव्यवस्था के सुचारू संचालन के लिए उत्तरदायी भारतीय रिजर्व बैंक
    सिद्धान्त I-अवधारणा माप उपकरण (कागज/घड़ी)

     12-01-2021 11:40 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id