मानवता की सबसे बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धियों में से एक है, लेजर इंटरफेरोमीटर गुरुत्वीय-तरंग वेधशाला द्वारा किये गये अवलोकन

लखनऊ

 22-11-2020 10:34 AM
सिद्धान्त I-अवधारणा माप उपकरण (कागज/घड़ी)
गुरुत्वाकर्षण तरंगें, दिक्-काल (Space-time) में एक प्रकार की लहरें या तरंगे हैं, जो कि, ब्रह्मांड में सबसे अधिक हिंसक और ऊर्जावान प्रक्रियाओं के कारण उत्पन्न होती हैं। अल्बर्ट आइंस्टीन (Albert Einstein) ने 1916 में सापेक्षता के अपने सामान्य सिद्धांत में गुरुत्वाकर्षण तरंगों के अस्तित्व की भविष्यवाणी की थी। आइंस्टीन के गणित ने यह बताया कि, व्यापक रूप से त्वरित वस्तुएं (जैसे न्यूट्रॉन (Neutron) तारे या ब्लैक होल (Black holes) एक दूसरे की परिक्रमा करते हैं), दिक्-काल को इस तरह से बाधित करती हैं कि, दिक्-काल की उत्तेजित तरंगे, स्रोत से दूर सभी दिशाओं में फैल जाती हैं। ये ब्रह्मांडीय तरंगें प्रकाश की गति से यात्रा करती हैं, तथा अपने साथ अपनी उत्पत्ति की जानकारी भी वहन करती हैं। साथ ही ये गुरुत्वाकर्षण की प्रकृति के बारे में भी संकेत देती हैं। सबसे मजबूत गुरुत्वीय तरंगें प्रलयकारी घटनाओं से उत्पन्न होती हैं, जैसे ब्लैक होल का टकराना, सुपरनोवा (Supernovae- तारों का अपने जीवन काल के अंत में बड़े पैमाने पर विस्फोटित होना), और न्यूट्रॉन (Neutron) तारों का टकराना। ऐसा अनुमान है कि, अन्य तरंगे न्यूट्रॉन तारों के चक्रण से उत्पन्न होती हैं, जो पूर्ण रूप से गोलाकार नहीं हैं तथा संभवतः बिग बैंग (Big Bang) द्वारा बनाए गए गुरुत्वाकर्षण विकिरण के अवशेष भी हैं। हालांकि आइंस्टीन ने 1916 में गुरुत्वाकर्षण तरंगों के अस्तित्व की भविष्यवाणी की थी, लेकिन उसके अस्तित्व का पहला प्रमाण 1974 या उनकी मृत्यु के 20 साल बाद तक भी नहीं मिल पाया था। उस वर्ष में, प्यूर्टो रिको (Puerto Rico) में अरेसिबो रेडियो (Arecibo Radio) वेधशाला का उपयोग कर दो खगोलविदों ने एक बाइनरी पल्सर (Binary pulsar) की खोज की, यह एक उसी प्रकार की प्रणाली थी जिसकी, भविष्यवाणी सापेक्षता के सामान्य सिद्धांत ने की थी। यह जानते हुए कि इस खोज का उपयोग आइंस्टीन की साहसी भविष्यवाणी को परखने के लिए किया जा सकता है, खगोलविदों ने यह मापना शुरू किया कि, समय के साथ सितारों की परिक्रमा कैसे बदलती है? आठ साल के अवलोकन के बाद उन्होंने निर्धारित किया कि, यदि सितारे गुरुत्वाकर्षण तरंगों का उत्सर्जन करते हैं, तो वे सामान्य सापेक्षता द्वारा अनुमानित दर से एक दूसरे के करीब आ रहे हैं। 14 सितंबर, 2015 को लेजर इंटरफेरोमीटर गुरुत्वीय-तरंग वेधशाला (Laser Interferometer Gravitational-Wave Observatory- LIGO) ने भौतिक रूप से दिक् काल में उत्पन्न तरंगों को महसूस किया। ये तरंगें उन गुरुत्वाकर्षण तरंगों के कारण हुई थी, जिन्हें 130 करोड़ प्रकाश वर्ष दूर, दो टकराने वाले ब्लैक होल द्वारा उत्पन्न किया गया था। LIGO की खोज मानवता की सबसे बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धियों में से एक है। हालांकि गुरुत्वाकर्षण तरंगें उत्पन्न करने वाली प्रक्रियाएँ बेहद हिंसक और विनाशकारी हो सकती हैं, लेकिन जब तक ये तरंगें पृथ्वी पर पहुँचती हैं, तब तक वे हजारों, अरबों गुना छोटी हो जाती हैं! वास्तव में, जिस समय LIGO के पहले अनुसंधान से गुरुत्वाकर्षण तरंगें हमारे पास पहुंचीं, उनके द्वारा उत्पन्न किया गया विक्षोभ एक परमाणु के नाभिक से 1000 गुना छोटा था! इस तरह के आश्चर्यजनक मापों को जानने के लिए ही LIGO बनाया गया था।

संदर्भ:
http://svs.gsfc.nasa.gov//vis/a010000/a010500/a010543/WhtDwrfCollid_ProRes_720x486_59.94fps.webmhd.webm
https://www.youtube.com/watch?v=C8oYbnj2AIY
https://www.ligo.caltech.edu/page/what-are-gw


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