शेरलॉक होम्स की कहानी में लखनऊ शहर महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

लखनऊ

 12-12-2020 10:11 AM
स्पर्शः रचना व कपड़े

मनोरंजन की दुनिया वर्षों से हमारे जीवन का एक अभिन्न अंग रही है। फिर चाहे वह बच्चे हों, युवा हों या वयस्क मनोरंजन के विभिन्न साधन सभी के लिए उपलब्ध हैं। टेलीविज़न और सिनेमा जगत इसके प्रमुख माध्यम हैं। फिल्में और नाटक हमें भावनात्मक रूप से प्रभावित करते हैं। इसी दिशा में आधुनिकता की छवि वेब–सीरीज़ (Web-series) के माध्यम से देखी जा सकती है। इनमें दिखाए गए पात्र और उनकी कहानियां लोगों के मन-मस्तिष्क में गहरी छाप छोड़ जाते हैं। शेरलॉक होम्स (Sherlock Holmes) की कहानी भी उन्हीं में से एक है जो विश्व स्तर पर खूब पसंद की गई।
सन 1887 में ब्रिटिश लेखक और डॉक्टर सर आर्थर इग्नेशियस कॉनन डॉयल (Doctor Sir Arthur Ignatius Conan Doyle) द्वारा स्ट्रैंड मैगज़ीन (Strand magazine) में लघु कथाओं की पहली श्रृंखला लिखी गई जिसमें चार उपन्यासों और छब्बीस लघु कहानियों में पहली ए स्टडी इन स्कारलेट (A Study in Scarlet) में जासूस शेरलॉक होम्स की दिलचस्प कहानी छपी जिसने दुनियाभर में ख़ूब प्रसिद्धि प्राप्त कर ली। लेखक को सर आर्थर कॉनन डॉयल या कॉनन डॉयल नाम से भी जाना जाता है। ब्रिटिश लाइब्रेरी (British Library) और कांग्रेस लाइब्रेरी (Library of Congress) के कैटलॉग (Catalog) में उन्हें उनके उपनाम "डॉयल" (Doyle) के नाम से जाना जाता है। द बेकर स्ट्रीट जर्नल (The Baker Street Journal) के संपादक स्टीवन डॉयल (Steven Doyle) के अनुसार “कॉनन” आर्थर का मध्य नाम था। हाई स्कूल (High School) से स्नातक होने के बाद उन्होंने “कॉनन” को अपने उपनाम के रूप में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। लेकिन तकनीकी तौर पर उनका अंतिम नाम बस 'डॉयल' है। कॉनन डॉयल का जन्म एडिनबर्ग (Edinburgh) में हुआ था और उन्हें नौ साल की उम्र में जेसुइट प्रिपरेटरी स्कूल (Jesuit Preparatory School) भेजा गया था। वर्ष 1876 से 1881 तक उन्होंने एडिनबर्ग विश्वविद्यालय में चिकित्सा का अध्ययन किया। विश्वविद्यालय में अपने कार्यकाल के उपरांत, डॉयल ने पश्चिम अफ्रीकी तट (West African coast) पर एक जहाज में डॉक्टर (doctor) के रूप में सेवा प्रदान की, और फिर 1882 में, उन्होंने प्लायमाउथ (Plymouth‌) में अभ्यास शुरु किया। हालाँकि उनकी चिकित्सा पद्धति असफल रही। इसी दौरान उन्होंने कहानियाँ लिखना भी आरम्भ कर दिया। इसके बाद उन्होंने अपना अभ्‍यास दक्षिण सागर में किया। परंतु बाद में उन्होंने साहित्य के क्षेत्र में कार्य करना आरम्भ कर दिया। उनका पहला महत्वपूर्ण कार्य ए स्टडी इन स्कारलेट (A study in scarlet) था जो 1887 में बीटन के क्रिसमस वार्षिक (Beeton's Christmas Annual) में दिखाई दिया था और इसमें शर्लक होम्स दुनिया के सामने आया। इसी के साथ ही डॉ वॅटसन के पात्र का भी उद्भव हुआ। होम्स और डॉ वाटसन की अपराध जगत से संबंधित कहानियां इस क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित हुईं। कहानी में दिखाए गए डॉ वॅटसन के पात्र का सुझाव कॉनन डॉयल को उनके एक ख़ास दोस्त डॉ मोहम्मद इब्राहिम सूफी ने दिया था जो लखनऊ के रहने वाले थे। डॉयल एक रचनात्मक लेखक थे। इन्होंने होम्स के अलावा नेपोलियन सैनिक ब्रिगेडियर जेरार्ड (Brigadier Gerard) की हास्य (Humorous) कहानियाँ और प्रोफेसर चैलेंजर (Professor Challenger) के बारे में काल्पनिक और विज्ञान कथाओं (Fantasy and Science Fiction) के साथ-साथ कई प्रसिद्ध कविताऐं, नाटक, रोमांस (Romance), गैर-कल्पना (non-fiction) और ऐतिहासिक उपन्यास भी लिखे हैं। कॉनन डॉयल जिन्हें अपराध कथाओं (crime fiction) का नवाब कहा जाता था उन्हें जासूस शेरलॉक होम्स की कहानी में उसके सहयोगी और व्यक्तिगत सहायक के रूप में डॉ वॅटसन (Dr. Watson) के पात्र को स्थान देने की सलह इब्राहिम द्वारा दी गई ऐसा कॉनन डॉयल की पांडुलिपि से ज्ञात तथ्यों से पता चलता है। कुछ शोधकर्ताओं का यह भी मानना है कि कॉनन डॉयल ने पूर्व के प्रभाव के कारण डॉ वाटसन को अफगान युद्ध में सेवा के लिए भेजा था। लखनऊ में ब्रिटिश भारत का ऐतिहासिक महत्व था जिसकी झलक कॉनन डॉयल के कार्यों में कई बार दिखाई देती है। कॉनन डॉयल के जासूसी थ्रिलर (Thriller) साइन ऑफ फोर (‘Sign of Four’ (1890)) में शेरलॉक होम्स द्वारा कुछ अन्य लोगों के साथ मामले की चर्चा करते हुए लखनऊ का नाम पाइप-स्मोकिंग (Pipe smoking) जासूस शरलॉक होम्स के रूप में प्रदर्शित हुआ। द स्ट्रेंज स्टोरी ऑफ जोनाथन स्मॉल (The Strange Story of Jonathan Small) के शीर्षक वाले अध्याय में, दो कथाएँ दिखाई गई जिनमें नवाबों के शहर लखनऊ को दर्शाया गया है। इस प्रकार कहा जा सकता है कि शेरलॉक होम्स की कहानी में लखनऊ शहर महत्वपूर्ण स्थान रखता है। शेरलॉक होम्स (Sherlock Holmes)
शेरलॉक होम्स एक काल्पनिक निजी जासूस (Fictional Private Detective) की कहानी है, जिसमें होम्स किसी अपराध मामले से संबंधित परामर्श देता है साथ ही वह अपने अवलोकन (observation), कटौती (deduction), फोरेंसिक विज्ञान (forensic science) और तार्किक विचारों (logical reasoning) के लिए प्रसिद्ध है। जटिल से जटिल मामलों को वह बडी़ चतुराई से सुलझा लेता है और बडी़ ही आसानी से अपराधी को खोज निकालता है। हालाँकि शेरलॉक होम्स दशक का एकमात्र कल्पनिक जासूस नहीं था। 1990 के दशक तक पहले से ही 25,000 से अधिक मंच रूपांतरण, फिल्में, टेलीविजन प्रोडक्शस (Television production) और प्रकाशन मौजूद थे, जिसमें जासूसी कहानियां दर्शाई जाती थीं, फिर भी होम्स विश्व स्तर पर बहुत पसंदीदा काल्पनिक जासूस बन गया। कहनी में होम्स के मित्र डॉ वॅटसन के पात्र द्वारा कई कहानियाँ सुनाई जाती हैं जिनमें से कई 221B बेकर स्ट्रीट (Baker Street), लंदन (London) इस पते से शुरू होती हैं। शेरलॉक होम्स के पात्र को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स (Guinness World Records) में फिल्म और टेलीविजन इतिहास में सबसे अधिक साहित्यिक–काल्पनिक मानवीय पात्र के रूप में सूचीबद्ध किया गया। कई लोग इसे एक काल्पनिक नहीं बल्कि एक वास्तविक जासूस समझते हैं इसी बात से होम्स की लोकप्रियता का अनुमान लगाया जा सकता है। 

संदर्भ:
https://www। hindustantimes। com/india/holmes-found-watson-thanks-to-a-lakhnavi/story-Q3jzhb8KOk0W2pHr7h97XN। html
http://archives। sundayobserver। lk/2005/10/23/juniorob02। html
https://en। wikipedia। org/wiki/Sherlock_Holmes
https://en। wikipedia। org/wiki/Arthur_Conan_Doyle
चित्र सन्दर्भ:
मुख्य चित्र में बेकर गली में शर्लक होम्स की प्रतिमा दिखाई गई है। (विकिमीडिया)
दूसरी तस्वीर में सर आर्थर कॉनन डॉयल को दिखाया गया है। (विकिमीडिया)
आखिरी तस्वीर में शर्लक होम्स और प्रोफेसर मोरियार्टी की घातक घटना की 100 वीं वर्षगांठ दिखाई गई है। (विकिमीडिया)


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