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इलेक्ट्रिक परिवहन को बढ़ावा देने हेतु किये जा रहे हैं, अनेकों प्रयास

लखनऊ

 24-02-2021 10:08 AM
य़ातायात और व्यायाम व व्यायामशाला
विद्युतीय या इलेक्ट्रिक (Electric) वाहनों का बाजार दुनिया भर में व्यापक रूप से फैलता जा रहा है। उच्च दबाव और जीवाश्म ईंधन में कमी के कारण परिवहन का पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन पर जो प्रभाव पड़ा है, उसे कम करने के लिए विद्युत या इलेक्ट्रिक परिवहन आवश्यक हो गया है। भारतीय ऑटोमोबाइल (Automobile) उद्योग दुनिया के सबसे बड़े उद्योगों में से एक है, तथा देश के आर्थिक विकास और वृद्धि में अत्यंत सहायक है। चूंकि वर्तमान समय में ऑटोमोबाइल उद्योग पर्यावरण प्रदूषण का एक कारक बन गया है, इसलिए सरकार इस दिशा में इलेक्ट्रिक परिवहन को बढ़ावा दे रही है। भारत में इलेक्ट्रिक वाहन बाजार बहुत बड़ा है, तथा 2030 तक इस बाजार के लगभग 5 करोड़ रुपये तक के होने की उम्मीद की गयी है।
राष्ट्रीय विद्युत परिवहन मिशन योजना (National Electric Mobility Mission Plan - NEMMP) के तहत, भारत सरकार ने 2015 में फास्टर अडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ (हाइब्रिड एंड) इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (Faster Adoption and Manufacturing of (Hybrid &) Electric Vehicles - FAME) योजना शुरू की, जिसका उद्देश्य देश में ऐसे वाहनों को बढ़ावा देना है, जो पर्यावरण के अनुकूल हों। चूंकि, एक मजबूत ऑटोमोबाइल क्षेत्र के साथ उत्तर प्रदेश भारत के सबसे बड़े उपभोक्ता आधारों में से एक है, इसलिए राज्य ने अपनी इलेक्ट्रिक वाहन विनिर्माण और परिवहन नीति (Electric Vehicle Manufacturing and Mobility Policy) 2019 शुरू की, ताकि राज्य को इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने और बुनियादी ढाँचे को बढ़ावा देने हेतु प्रोत्साहित किया जा सके। राज्य ने इलेक्ट्रिक वाहन निर्माताओं के लिए प्रोत्साहन आवंटित किया है, जिससे यह उम्मीद की जा रही है कि, 50,000 नई नौकरियों का सृजन होगा। भारत में उत्तर प्रदेश फास्टर एडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ हाइब्रिड एंड इलेक्ट्रिक व्हीकल्स का तीसरा सबसे बड़ा लाभार्थी रहा है तथा उसके पास लगभग 1,39,000 पंजीकृत इलेक्ट्रिक वाहन हैं, जो भारत में सबसे ज्यादा है। इस नीति का लक्ष्य अगले पांच सालों में इलेक्ट्रिक परिवहन तंत्र में 40,000 करोड़ से भी अधिक के निवेश को आकर्षित करना है। इस नीति का अन्य उद्देश्य ऐसी योजनाओं को शामिल करना है, जिनके माध्यम से वर्ष 2030 तक 1,000 इलेक्ट्रिक बसों और दस चिन्हित शहरों में 70% इलेक्ट्रिक सार्वजनिक परिवहनों को शुरू किया जा सके। विभिन्न संगठनों के अंतर्गत चलने वाले मोटर वाहनों और रसद वाहनों को धीरे-धीरे बंद कर दिया जायेगा तथा 2024 तक दस चिन्हित इलेक्ट्रिक वाहनों वाले शहरों में माल परिवहन के 50% तक इलेक्ट्रिक परिवहनों में बदलने की उम्मीद की गयी है। इन दस शहरों में नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, मथुरा, आगरा, कानपुर, लखनऊ, इलाहाबाद, गोरखपुर और वाराणसी शामिल हैं। 2024 तक वाहनों के सभी क्षेत्रों में लगभग दस लाख इलेक्ट्रिक वाहनों को लॉन्च (Launch) किये जाने हेतु अधिसूचित किया गया है। अगले 5 वर्षों में कम से कम 5GWh (Gigawatt hours) क्षमता की उच्च घनत्व बिजली भंडारण वाली विनिर्माण इकाइयों को शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा 2024 तक लगभग 2 लाख मंद और तीव्र चार्जिंग (Charging), स्वैपिंग स्टेशनों (Swapping stations) को स्थापित करने की योजना भी बनायी गयी है।
नीति के निवेश मानदंडों को निम्नलिखित प्रकार से समझा जा सकता सकता है:
मेगा एंकर प्रोजेक्ट (Mega Anchor Project) : यह एक एकीकृत परियोजना है, जो कम से कम 1000 करोड़ रुपये का निवेश करेगी तथा स्थापना के 3 साल के भीतर न्यूनतम 200 करोड़ रुपये के निवेश वाली सहायक ईकाइयों को समर्थन देगी। एंकर (Anchor EVMU) : भारतीय मूल उपकरण निर्माता, जो इलेक्ट्रिक वाहनों को डिजाइन (Design) और निर्मित करते हैं, न्यूनतम 500 करोड़ रूपये का निवेश कर कम से कम 10 विक्रेता ईकाइयों का निर्माण करेंगे।
एंकर (Anchor EBU) : भारतीय मूल उपकरण निर्माता, जो इलेक्ट्रिक वाहन बैटरी (Battery) या ईंधन सेल (Cell) को डिजाइन और निर्मित करते हैं, न्यूनतम 300 करोड़ रुपये के निवेश के साथ कम से कम 10 विक्रेता इकाइयां निर्मित करेंगे।
विक्रेता इकाइयाँ (Vendor units EVMU / EBU) : इसमें वे ईकाइयाँ शामिल हैं, जिन्हें एंकर ईकाइयों के समान एक ही समूह में रखा गया है, तथा जो अपने अंतिम उत्पाद का कम से कम 50% हिस्सा एंकर ईकाइयों को प्रदान करते हैं।
लार्ज ईवीएमयू (Large EVMUs) : 500 करोड़ रुपये का पूंजी निवेश या राज्य में कम से कम 2500 प्रत्यक्ष रोजगारों का सृजन।
लार्ज ईबीयू (Large EBUs) : रुपये 100 करोड़ से अधिक का पूंजी निवेश या न्यूनतम 1200 प्रत्यक्ष रोजगारों का सृजन।
MSME ईकाइयां (MSME units): फर्मों (Firms) के निर्माण और विद्युत परिवहन तंत्र के घटकों की मरम्मत के लिए सरकार ने प्रोत्साहन निर्दिष्ट किया है।
अल्ट्रा-मेगा बैटरी प्लांट (Ultra-Mega Battery Plant) : बैटरी और ईंधन सेल निर्माण के लिए वार्षिक 1GWh उत्पाद वाला एक प्लांट स्थापित किया जाएगा।

संदर्भ:
https://bit.ly/3syjLAD
https://bit.ly/3kistzH

चित्र संदर्भ:
मुख्य तस्वीर में लखनऊ और एक इलेक्ट्रिक कार दिखाई गई है जो चार्ज हो रही है। (प्रारंग)
दूसरी तस्वीर में फास्टर अडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ (हाइब्रिड एंड) इलेक्ट्रिक व्हीकल्स दिखाया गया है। (प्रारंग)
तीसरी तस्वीर में टेस्ला चार्जिंग सेंटर और शोरूम को दिखाया गया है। (flicker)


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