Post Viewership from Post Date to 08-Apr-2021 (5th day)
City Subscribers (FB+App) Website (Direct+Google) Email Instagram Total
2289 56 0 0 2345

***Scroll down to the bottom of the page for above post viewership metric definitions

भारत की चटपटी चटनी चख रही है पूरी दुनिया।

लखनऊ

 03-04-2021 10:29 AM
स्वाद- खाद्य का इतिहास
भारतीय व्यंजनों पर कई दशकों से अनगिनत प्रयोग किये गए हैं। जिसके परिणाम स्वरूप आज कई भारतीय व्यंजन पूरी दुनिया में बेहद लोकप्रिय हैं। खासतौर पर “चटनी” के प्रशंसकों की अपनी एक लंबी फेहरिस्त है। मूलतः चटनी को एक संस्कृत शब्द “चाटने” से लिया गया है, जिसका एक अन्य अर्थ “दो अथवा दो से अधिक चीजों (खाद्य पदार्थों के परिपेक्ष में) का मिश्रण भी होता हैं। “ चटनी किसी भी भोजन के लिए स्वाद उत्प्रेरक का काम करती है। भारत में मुख्य रूप से मसालेदार और चटपटा भोजन पसंद किया जाता है। और चटनी को हर तरह के मसालेदार व्यंजनों के साथ शामिल किया जा सकता है, फलस्वरूप भोजन अधिक स्वादिष्ट और चटपटा लगने लगता है।
भारत में सामान्य रूप से चटनी मसालों और फलों के मिश्रण को सिलबट्टे में पीसकर अथवा ब्लेंडर में ब्लेंड कर बनायी जाती है। भारत में बनने वाली चटनी में मूलतः सौंफ, नमक, अदरक, हींग, जीरा,आम, सेब, नाशपाती, इमली, प्याज, नींबू, टमाटर, किशमिश, सिरका, चीनी, शहद, खट्टे छिलके, लहसुन, अदरक, पुदीना, हल्दी, दालचीनी, सीताफल इत्यादि मुख्य मसालों का इस्तेमाल किया जाता है। यहाँ आमतौर पर नारियल, प्याज, इमली, टमाटर, धनिये, पुदीने, आम, लहसुन, मिर्च की चटनी विख्यात है। अधिकतर चटनियाँ कच्चे फलों को सिलबट्टे पर पीसकर बनाई जाती हैं, परंतु कई अन्य प्रकार की चटनियां फलों को पकाकर, पीसकर भी निर्मित की जाती हैं।
चटनी की उत्पत्ति सर्वप्रथम लगभग 500 ईसा पूर्व भारतीय उपमहाद्वीप में में हुई। तथा गुजरते समय के साथ-साथ रोमन जनसाधारण ने चटनी के बारे में जाना। और इसे लम्बे समय तक संरक्षित करने का उपाय भी खोजा। 1600 के दशक की शुरुआत में चटनी इंग्लैंड के रास्ते फ़्रांस में भी पहुँची, जहां आम की चटनी ने लोकप्रियता पाई। जब चटनी का स्वाद अंग्रेजी भाषी देशों जैसे कि अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में पहुँचा। तब वहाँ भी इसे बेहद पसंद किया जाने लगा। फिर धीरे-धीरे 17 वीं शताब्दी में इसका विस्तार कैरेबियाई देशों में भी होने लगा। चटनी को अफ़्रीकी देशों में पहुंचाने का श्रेय भारतीय आप्रवासियों को जाता है। जहाँ यह आज भी बेहद लोकप्रिय है। चटनी को औसतन 2 महीनो तक संग्रहित किया जा सकता है। जल्दी खराब होने से बचाने के लिए चटनी में बेंजोइक एसिड रासायनिक परिरक्षक का इस्तेमाल किया जाता है।
चटनी कई मायनों में फायदेमंद साबित हो सकती है। जैसे की:-
● इसे हर प्रकार के भोजन के साथ मिलाकर खाया जा सकता है।
● चटनी कई प्रकार के फलों से मिलकर बनाई जाती है,अतः किसी भी उपलब्ध मौसमी फल से चटनी बनाई जा सकती है।
● चूँकि चटनी कच्चे फलों और मसालों को मिलाकर बनाई जाती है। इस मायने में यह सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद साबित हो सकती है।
● चटपटे और तीखे स्वाद के कारण यह बच्चों और बुजुर्गों में खासा लोकप्रिय है।
● हम बेहद कम संसाधनों के साथ भी स्वादिष्ट चटनी बना सकते हैं।
● चटनी बनाने में बहुत अधिक समय व्यर्थ नहीं होता।
● कुछ खास प्रकार की चटनियाँ चाइनीज़, जापानी, व्यंजनों के साथ बेहद लोकप्रिय हैं जो व्यापार वृद्धि में भी सहायक हो सकती हैं।
● चटनी तैयार करने के लिए बहुत कम ईंधन की आवश्यकता होती है, क्योंकि यह आमतौर पर कच्ची होती है।
● भोजन प्लेट पर इसे बेहद कम मात्रा में लिया जाता है।

चटनी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे कोई भी व्यक्ति चावल, रोटी के साथ दाल, सब्जी के एक वैकल्पिक भोज्य पदार्थ के रूप में ले सकते हैं। कभी-कभी सिर्फ चावल, दही और चटनी से एक स्वादिष्ट दावत की व्यवस्था हो जाती है। हमारे देश के कुछ हिस्सों में चटनी का बहुतायत में उपयोग किया जाता है। उदाहरण के लिए एक पहाड़ी राज्य उत्तराखंड को ले सकते हैं। उत्तराखण्ड एक पहाड़ी राज्य है, जहां विभिन्न किस्म के फल पाये जाते है। यहाँ खुमानी, सेब और सबसे अधिक भांग की चटनी का स्वाद अद्वितीय हैं। बस्तर, छत्तीसगढ़ में तो चीटियों को पीसकर माँसाहारी चटनी बनाई जाती है। हम अनुमान ही लगा सकते हैं, कि वह कितनी कुरकुरी होती होगी।

संदर्भ:
https://bit.ly/3dxrkkP
https://bit.ly/3ujxAUo
https://bit.ly/3sNskrG
https://mamellada.gr/history-of-chutney/
https://bit.ly/3rGzFrC

चित्र संदर्भ:
मुख्य चित्र आम की चटनी दिखाता है। (फ़्लिकर)
दूसरा चित्र मेजर ग्रे की चटनी के साथ समोसा दिखाता है। (विकिमेडिया)
तीसरे चित्र में विभिन्न प्रकार के चटनी दिखाती हैं। (विकिमेडिया)


***Definitions of the post viewership metrics on top of the page:
A. City Subscribers (FB + App) -This is the Total city-based unique subscribers from the Prarang Hindi FB page and the Prarang App who reached this specific post. Do note that any Prarang subscribers who visited this post from outside (Pin-Code range) the city OR did not login to their Facebook account during this time, are NOT included in this total.
B. Website (Google + Direct) -This is the Total viewership of readers who reached this post directly through their browsers and via Google search.
C. Total Viewership —This is the Sum of all Subscribers(FB+App), Website(Google+Direct), Email and Instagram who reached this Prarang post/page.
D. The Reach (Viewership) on the post is updated either on the 6th day from the day of posting or on the completion ( Day 31 or 32) of One Month from the day of posting. The numbers displayed are indicative of the cumulative count of each metric at the end of 5 DAYS or a FULL MONTH, from the day of Posting to respective hyper-local Prarang subscribers, in the city.

RECENT POST

  • बैसाखी के महत्व को समझें और जानें कि सिख समुदाय में बैसाखी का त्योहार कितना खास है
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     14-04-2021 01:08 PM


  • दुनिया के सबसे लंबे सांप के रूप में प्रसिद्ध है,जालीदार अजगर
    रेंगने वाले जीव

     13-04-2021 01:00 PM


  • क्यों लैलत-अल-क़द्र वर्ष की सबसे महत्वपूर्ण रात मानी जाती है?
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     12-04-2021 10:10 AM


  • भिन्‍नता में एकता का प्रतीक कच्‍छ का रण
    मरुस्थल

     11-04-2021 10:00 AM


  • लबोर एट कॉन्स्टेंटिया
    उपनिवेश व विश्वयुद्ध 1780 ईस्वी से 1947 ईस्वी तक

     10-04-2021 10:28 AM


  • कैसे रोका जा सकता है वृद्धावस्‍था को?
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     09-04-2021 10:13 AM


  • उत्तर प्रदेश के किसानों के बीच अत्यधिक लोकप्रिय है, मेंथॉल मिंट की खेती
    भूमि प्रकार (खेतिहर व बंजर)

     08-04-2021 09:57 AM


  • पठानों द्वारा विकसित किये गये थे, मलिहाबाद के आम बागान
    साग-सब्जियाँ

     07-04-2021 10:10 AM


  • असली क्रिसमस के पेड़ों की मांग में देखी जा रही है बढ़ोतरी
    पेड़, झाड़ियाँ, बेल व लतायें

     06-04-2021 10:07 AM


  • अवैध शिकार के कारण विलुप्त होने की कगार पर प्रवासी पक्षी प्रजातियां
    पंछीयाँ

     05-04-2021 09:59 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id