मछलीपालन का इतिहास: क्या मछलीघर में उपयोग होने वाली दवा कोविड-19 से संक्रमित लोगों के उपचार

लखनऊ

 05-05-2021 09:18 AM
पर्वत, चोटी व पठारनदियाँसमुद्र


लखनऊ में स्थित गंगा मछलीघर भारत के सबसे बड़े मछलीघरों में से एक है, जिसका प्राथमिक उद्देश्य इसके माध्यम से लोगों को जलीय जीवन के विषय में जानकारी देना तथा जलीय जीवन के संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करना है।इस मछलीघर को एक गोलाकार इमारत में बनाया गया है, जिसमें केंद्र में सजावटी नक्काशीदार फव्वारे वालाभंवर है, जो संगमरमर के नक्काशीदार मत्स्यांगना मछली और सुंदर जीवित सजावटी मछलियों को मनोविनोद के लिए सजाया गया है।मछलीघर एक ऐसा स्थान होता है जिसमें एक स्थान पारदर्शी होता है ताकि अंदर मौजूद जलीय जीव को बाहर से देखा जा सके। इस प्रकार के स्थान का प्रयोग मछली, जलीय शरीसृप तथा जलीय पौधे आदि रखने के लिए किया जाता है।
मछलीघर के सिद्धांत को सन् 1850 में रसायन शास्त्री रोबर्ट वारिंगटन (Robert Warington) द्वारा पूरी तरह से विकसित किया गया था, उन्होंने समझाया कि पानी के अंदर पौधे रखने से जीवों को ऑक्सीजन (Oxygen) प्रचुर मात्रा में मिलती है।वहीं मछलीघर के जुनून को प्रसिद्धि दिलाने का कार्य गोसे (Gosse) के द्वारा किया गया था जब उन्होंने सन् 1853 में लंदन (London)के चिड़ियाघर में पहला सार्वजनिक मछलीघर का निर्माण किया तथा सन् 1854 में द एक्वेरियम: द उनवेलिंग ऑफ़ द वंडर्स ऑफ़ द डीप सी (The Aquarium: An Unveiling of the Wonders of the Deep Sea) नामक पुस्तिका का प्रकाशन किया था।
मछलीपालन का सर्वप्रथम इतिहास चीन(China) से मिलता है, जब सन् 1369 में चीन के होंग्वु (Hongwu) सम्राट द्वारा चीनी मिट्टी के बर्तन बनाने वाले कारखाने की स्थापना की, जिसमें उन्होंने सुनहरी मछलियों को रखने के लिए बड़े आकार के चीनी मिट्टी के टब का उत्पादन किया था। हालांकि समय के साथ लोगों द्वारा उस टब का रूपांतरण हमारे समक्ष आज मौजूद आधुनिक मछली के कटोरे का आकार ले चुका है। इसी के बाद धीरे-धीरे मछलीघरों की तकनीकी में विकास हुआ और आज यह वर्तमान स्थिति में पहुँच गया है। आज वर्तमान समय में अधिकांश लोग अपने घरों, दफ्तरों में विभिन्न आकारों के मछलीघरों को रखना पसंद करते हैं।लोगों के समक्ष इसकी पसंद की बढ़ती मांग के चलते यह एक अत्यंत ही महत्वपूर्ण व्यवसाय के रूप में भी निखर कर सामने आया है। यह देश के सामाजिक और आर्थिक विकास में एक अत्यंत ही महत्वपूर्ण भूमिका बनाए हुए हैं। साथ ही मत्स्य पालन और जलीय कृषि में शामिल अपेक्षाकृत सरल तकनीक को ध्यान में रखते हुए, यह निर्यात आय में मदद करने के अलावा, पर्याप्त रोजगार के अवसर उत्पन्न करने की क्षमता रखता है। केवल इतना ही नहीं यह देश के उन लोगों के लिए आजीविका का श्रोत मुहैया कराती है जो कि अत्यंत ही पिछड़े वर्ग में आते हैं। यह व्यवसाय 14.49 मिलियन (Million) से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान करता है, वहीं यदि भारत की बात की जाए तो यह विश्व में मात्र एक प्रतिशत का हिस्सेदार है और वहीं सजावटी मछली के उत्पाद में यह 158.23 लाख रुपये का राजस्व प्रदान करता है जो कि दुनिया का केवल 0.008 फीसद है।
सजावटी मछली पालन के माध्यम से उद्यमिता विकास दिन-प्रतिदिन लोकप्रियता प्राप्त कर रहे हैं। इसलिए, अधिक लोग खेती के माध्यम से इन मछलियों की खेती और प्रजनन के इस आकर्षक व्यवसाय में प्रवेश कर रहे हैं। नतीजतन, पालतू जानवरों की दुकानों के रूप में कई अधीनस्थ शहरों और यहां तक कि छोटे शहरों से भी सामने आ रहे हैं। इसके साथ ही बुनियादी आवश्यकताओं में से एक व्यक्ति को मछली की आदतों और जैविक आवश्यकताओं की स्पष्ट समझ होनी चाहिए। शौकीन लोग मछलीघर रखरखाव के दौरान मछली के व्यवहार और जीव विज्ञान का अध्ययन कर सकते हैं और मछली की कई किस्मों का प्रजनन कर सकते हैं।

लेकिन वर्तमान स्थिति को यदि देखा जाएं तो कोरोनावायरस (Coronavirus) का संक्रमण काफी तेज गति से फैल रहा है, जिस कारण सभी कार्य रुक से गए हैं और लोगों के मन में उलझन और भय की स्थिति भी उत्पन्न हो रही है। उदाहरण के लिए, महामारी के शुरुआत में कुछ लोगों द्वारा यह मान लिया गया कि मछलीघर की सफाई (मछलीघर में उपजे शैवाल को मारने के लिए इस दवाई का उपयोग किया जाता है) के लिए प्रयोग होने वाली क्लोरोक्वीन फास्फेट (Chloroquine phosphate) कोविड-19 (Covid-19) के लिए एक संभावित उपचार हो सकता है।
लेकिन रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (Centers for Disease Control and Prevention) द्वारा इस दवाई के उपयोग को लेकर चेतावनी जारी की, क्योंकि इस दवाई के सेवन से क्षति और मृत्यु तक होने की संभावनाएं हैं।रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र का कहना है कि वर्तमान में कोई एफडीए (FDA)-अनुमोदित दवाएं नहीं हैं जो कोविड-19 का इलाज कर सकती हैं।फार्मास्युटिकल क्लोरोक्विनफॉस्फेट और हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विनसल्फेट (Hydroxychloroquine sulfate) को एफडीए द्वारा मलेरिया (Malaria), ल्यूपस (Lupus) और रुमेटीइडगठिया ((Rheumatoid arthritis)) जैसे विशिष्ट चिकित्सा स्थितियों के इलाज के लिए अनुमोदित किया हुआ है।वर्तमान में, इन दवाओं का अध्ययन और मूल्यांकन कोविड-19 के उपचार के रूप में किया जा रहा है।हालाँकि, इस संक्रमण को रोकने या इसका इलाज करने की उनकी प्रभाव कारिता अभी अज्ञात है।

संदर्भ :-
https://bit.ly/3nNV6XD
https://bit.ly/3nzBq9G
https://bit.ly/2Shl8qq
https://bit.ly/3xEeVVB
https://bit.ly/3u3VqDL
https://bit.ly/3ucWbdJ


चित्र संदर्भ:-
1. मछलियों का एक चित्रण (pixabay)
2. मछलीघर का एक चित्रण (Wikimedia)
3. मछलीघर का एक चित्रण (Wikimedia)



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