ऑफिस डिज़ाइन का इतिहास:आने वाले वर्षों में क्यों बढ़ने वाला है को वर्किंग स्पेस का चलन

लखनऊ

 01-06-2021 08:47 PM
वास्तुकला 2 कार्यालय व कार्यप्रणाली


लखनऊ, बड़ा इमामबाड़ा, छोटा इमामबाड़ा इत्यादि जैसे वास्तुशिल्प चमत्कारों की एक लंबी सूची का घर है,लेकिन वास्तुकला का एक पहलू जिसे आज की दुनिया में अक्सर अनदेखा किया जाता है वह हमारे कार्यस्थलों (Workplaces) की वास्तुकला है। जैसे-जैसे स्वास्थ्य के बारे में हमारा ज्ञान और उत्पादकता में हमारा शोध आगे बढ़ता है, यह तेजी से स्पष्ट होता जाता है कि केवल चीजें ही नहीं हैं जो हमारी उत्पादकता को बढ़ावा देती है, जहां हम काम करते है वे स्थान भी हमारी उत्पादकता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। कई अध्ययन अब इस दृष्टिकोण का समर्थन करते हैं कि कुछ कार्यालय सुविधाओं का वास्तव में हमारे उत्पादकता स्तरों पर सकारात्मक, या नकारात्मक प्रभाव हो सकता है।एक्सेटर विश्वविद्यालय (University of Exeter) द्वारा 2014 के एक अध्ययन में पाया गया कि एक कार्यालय में यदि पौधों को रखा जाये तो उनकी सुंदरता से उत्पादकता में 15% की वृद्धि हो सकती है। शोधकर्ताओं ने पाया की कार्यालयों में पौधों की हरियाली से हवा की गुणवत्ता, एकाग्रता के स्तर में वृद्धि होती है और कर्मचारियों में कार्यस्थल के प्रति संतुष्टि की भावना पैदा होती है।
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी (Harvard University) द्वारा किए गए एक और अध्ययन में पाया गया प्रकृति के साथ काम करने से उत्पादकता के स्तर सुधार आता है। और भी कई अन्य कारक है जो कार्यस्थलों की वास्तुकला में विशेष महत्व रखते है और कर्मचारियों की उत्पादकता स्तर पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। यह कारक निन्मलिखित हैं:
 प्रकाश (light): ऑफिसों (Offices) में उत्पादकता पर विभिन्न प्रकाश स्तरों का भी प्रभाव पड़ता है। एथोनोमिक्स: डिजाइनिंग फॉर द प्रिंसिपल्स ऑफ द मॉडर्न वर्कप्लेस (Ethonomics: Designing for the Principles of the Modern Workplace) किताब दर्शाती है कि रंगहीन 'हल्की रोशनी', एक उदासीन कार्यालय में न केवल कर्मचारियों के मूड में सुधार करती है बल्कि उत्पादकता स्तर भी बढ़ाती है। साथ ही साथ ऑफिसों को यह ध्यान में रख कर डिज़ाइन (design) किया जाये कि दिन का उजाला ज्यादा से ज्यादा अंदर आये। दिन के उजाले के वातावरण में श्रमिकों में आंखों के खिंचाव, सिरदर्द और धुंधली दृष्टि जैसे लक्षणों में 84% की गिरावट दर्ज की गई है।
 बाहर ब्रेक लेंने की सुविधा (Take breaks outdoors): बेहतर उत्पादकता के लिये यदि आपके कार्यस्थल में प्राकृतिक प्रकाश और हवा की पहुंच नहीं है तो ताजी हवा और धूप पाने के लिए नियमित रूप से बाहर ब्रेक लेंने की सुविधा हो। साथ ही साथ ऑफिसों को ऐसे डिज़ाइन किया जाये जहां कर्मचारी अपने तनाव को दूर कर सकते हो।
 हवा की गुणवत्ता: यह सबसे बुनियादी कारकों में से एक है। हवा की खराब गुणवत्ता से मन और दिमाग अप्रसन्न रहते हैं, जिसका प्रभाव हमारी उत्पादकता पर पड़ता है। उपरोक्त कारकों के अलावा दृश्य सौंदर्यशास्त्र (Visual Aesthetics), अच्छा इंटीरियर (Interiors) आदि कारक भी उत्पादकता बढ़ाने में सहायक है। ऑफिसों के इतिहास की बात करें तो पहले के लोग हम से कहीं अधिक समय कार्यालय में बिताते थे। परिवारों की तुलना में अपने मालिकों और सहकर्मियों को अधिक देखते हैं। यदि हम इतिहास पर नजर डाले तो एक प्राकृतिक विकास देखेंगे जो कार्य प्रक्रियाओं के अलावा हमारी संस्कृति, आर्थिक विकास, तकनीक और फैशन में बदलाव से भी आ रहा हैं।रोमनों (Romans) ने ही हमारे लिये कार्यालय की विरासत छोड़ी है। प्राचीन रोम (Ancient Rome) का अपना व्यवसायिक जिला था। ऑफिस शब्द ही रोमन लैटिन 'ऑफिसियम' (Officium) से लिया गया है, जिसका अर्थ है 'ब्यूरो' (bureau) होता है। धीरे-धीरे ऑफिसों की ये अवधारणा दुनियाभर में फैल गई। अठारहवीं शताब्दी आते आते ब्रिटेन (Britain) में पहले समर्पित कार्यालयों में से दो के निर्माण को देखा गया। 1729 में भारत में भी कई उद्देश्यों से निर्मित कार्यालय भवन का उद्घाटन किया गया था क्योंकि लीडेनहॉल स्ट्रीट (Leadenhall Street) पर, ईस्ट इंडिया कंपनी (East India Company) को भारत और एशिया के साथ लंबी दूरी के व्यापार के लिये बढ़ती नौकरशाही को संभालने के लिए नियोजित हजारों कर्मचारियों के मुख्यालय की आवश्यकता थी। 20 वीं शताब्दी आते आते खुले ऑफिसों की योजना का जन्म हुआ। ये ओपन प्लान ऑफिस स्पेस (open plan office space) आर्किटेक्ट (Architect) फ्रैंक लॉयड राइट (Frank Lloyd Wright) की देन है। आज के इस दौर में यह योजना वापस आ गई है। जिसमें श्रमिकों को क्यूबिकल (Cubicles) के अलगाव से बाहर निकलने और कार्यस्थल में स्वतंत्र रूप से बातचीत करने और सहयोग करने की अनुमति मिली है। फ्रीलांसरों (Freelancers) की संख्या में वृद्धि से को-वर्किंग स्थानों (Co-Working space) की संख्या में वृद्धि हुई है।
को-वर्किंग स्पेस यानी काम करने के लिए सस्ता और सुविधाओं से भरा एक साझा किया जाने वाला ऑफिस।जो लोग फ्रीलांस काम करते हैं, दूर से काम करते हैं या आज स्टार्टअप स्थापित कर रहे हैं तो उनके लिए को-वर्किंग स्पेस लाभदायक है। यह कार्यक्षेत्र संगठन का एक नया रूप है। इसमें घर पर काम करने के बजाय, लोग एक सामान्य कमरा किराए पर लेते हैं, और स्वतंत्र रूप से संचार की कमी का अनुभव किए बिना, एक साथ काम करने, विचारों को साझा करके और एक दूसरे की मदद करके अपना अपना काम करते हैं।फ्रीलांसर लोग लागत बचाने के लिए इस विकल्प का चुनाव करते हैं। वहीं स्टार्टअप्स और छोटे उद्यमी लागत के साथ-साथ इन्फ्रास्ट्रक्चर (infrastructure) को भी ध्यान में रखकर इसका चुनाव कर रहे हैं। को-वर्किंग स्पेस 2005 में न्यूबर्ग (Neuberg) द्वारा विकसित किया गया था जब उन्होंने फ्रीलांसरों की स्वतंत्रता को एक कार्यालय स्थान की संरचना और समुदाय के साथ संयोजित करने का निर्णय लिया। न्यूबर्ग के अनुसार, अस्तित्व में आने वाला पहला को- वर्किंग स्पेस सैन फ्रांसिस्को को-वर्किंग स्पेस (San Francisco Coworking Space) था। न्यूबर्ग द्वारा इस प्रवृत्ति को बढ़ावा देने के तुरंत बाद न्यूयॉर्क (New York) शहर का पहला को-वर्किंग स्पेस ब्रुकलिन को-वर्किंग (Brooklyn Coworking) 2006 में खुला। इसके बाद 2007 में ऑस्टिन और फीनिक्स (Austin and Phoenix) जैसे शहरों में इसका विस्तार किया गया। 2009 में, वैश्विक सहकर्मी असंबद्ध सम्मेलन (Global Coworking Unconference Conference) स्थापित किया गया था। धीरे धीरे यह अवधारणा इतनी तेजी से आगे बढ़ी कि 2012 तक, दुनिया में 2,000 से अधिक को-वर्किंग स्थान बन गये थे। 2021 में, दुनिया भर में दर्जनों प्रमुख को-वर्किंग स्थान कंपनियां हैं; इस उद्योग में निरंतर वृद्धि हो रही है। वास्तव में, इनके विकास में इतनी तेजी हो रही है कि दुनिया भर में को-वर्किंग स्थान की संख्या 2024 तक 40,000 से अधिक तक पहुंचने का अनुमान है। 2020 तक 3 मिलियन लोगों ने इन को-वर्किंग स्थानों को साझा किया था। को वर्किंग स्पेस का सबसे बड़ा फायदा ये है कि यहां विभिन्न सेक्टर से जुड़े लोग एक ही छत के नीचे उपलब्ध होते है जिस से कम करना या बिज़नेस करना बहुत आसान हो जाता है। जैसे की हर सिक्के के दो पहलू होतें हैं, इसी तरह को-वर्किंग मोड से लोगों को काम करने में कई परेशानी भी हुई है लेकिन, इसी के साथ इसमें कई फायदे भी छूपे हुए हैं: फायदे:यहां आपको कई व्यवसायों से संबंधित लोगों के साथ मिलने का अवसर मिलता है और आपकी नेटवर्किंग (Networking) मजबूद होती जाती है।यहां आपको अक्सर समान विचारधारा वाले लोगों मिल सकते हैं। को वर्किंग स्पेस का सबसे बड़ाफायदा ये है कि यहां विभिन्न सेक्टर से जुड़े लोग एक ही छत के नीचे उपलब्ध होते है जिससे काम करना या बिज़नेस करना बहुत आसान हो जाता है। मान लो यदि किसी का काम कंप्यूटर को इंस्टाल करना है,तो उसे कोई कंप्यूटर प्रोग्रामर का काम उसी छत के नीचे मिल जायेगा। साथ ही साथ आप आसानी से अपने व्यवसाय के लिए मूल्यवान कौशल वाले लोगों से मिल भी सकते हैं। यहां आप अपनी लागतों को कम रखते हुये भी मूल्यवान सुविधाओं को प्राप्त और प्रस्तुत कर सकते हैं। उन लोगों के लिए जिनके पास स्थायी कार्य आधार नहीं है, उनके लिये ये फायदेमंद हो सकता है, वे चाहे तो कुछ दिन के लिये को-वर्किंग स्पेस का फायदा उठा सकते हैं। इसके अलावा इन नए उद्यमियों को कुछ सुविधाएं प्रदान करना भी एक कारोबार बन गया है। नुकसान: अपना खुद का कार्यालय होने का एक लाभ यह है कि आप इसको अपने हिसाब से डिजाइन (Design) कर सकते हो, परंतु को-वर्किंग स्पेस में यह संभव नहीं। सामान्यतया, आप जितना अधिक भुगतान करने को तैयार होंगे को-वर्किंग स्पेस उतना ही उच्च गुणवत्ता वाला होगा, जिसमें अच्छी तरह से डिजाइन किया गया कमरा, रिक्त स्थान का एक अच्छा संतुलन सुखद अनुभव होगा। कई बार ये स्थान ध्यान भंग करने वाले भी हो जाते हैं, क्योंकि ये इमारतें अक्सर शहर के लोकप्रिय क्षेत्रों में स्थित होती हैं, इसमें बहुत भीड़ भी हो सकती है, जिससे ध्यान केंद्रित करना मुश्किल हो सकता है। इसके अलावा यहां अपने कार्य की गोपनीयता बनाये रखना कठिन हो सकता है।

संदर्भ:
https://bit.ly/3fzlT7n
https://bit.ly/3c3GcYw
https://bit.ly/3yX6Xrx
https://bit.ly/3fZgOEr
https://bit.ly/3yJjkY5
https://bit.ly/3vE3E6u
https://bit.ly/3wIgO2b

चित्र संदर्भ
1. को वर्किंग उदहारण का एक चित्रण (unsplash)
2. प्राकर्तिक रूप दिए गए ऑफिस रूम का एक चित्रण (unsplash)
3. ओपन प्लान ऑफिस स्पेस का एक चित्रण (unsplash)



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