लखनऊ में प्रसिद्ध और विस्मृत विरासतों को संरक्षण और सुरक्षा प्रदान करने के लिए कौन है उत्तरदायी?

लखनऊ

 11-07-2021 08:23 AM
वास्तुकला 1 वाह्य भवन

हमारे लखनऊ शहर में अनेकों प्रसिद्ध और विस्मृत विरासत संरचनाएं मौजूद हैं, किंतु क्या आप जानते हैं, कि इन प्रसिद्ध और विस्मृत विरासत संरचनाओं के संरक्षण और सुरक्षा के लिए समग्र रूप से कौन सा संगठन उत्तरदायी है? इन अनूठी संरचनाओं के संरक्षण और सुरक्षा के लिएमुख्य रूप से दो संगठन उत्तरदायी हैं। पहला संगठन एक सरकारी संगठन है, जिसे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण(Archaeological Survey of India -ASI) के नाम से जाना जाता है, तथा दूसरा संगठन एक एनजीओ है, जिसे इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज(Indian National Trust for Art & Cultural Heritage - INTACH) के नाम से जाना जाता है। ये दोनों संगठन लखनऊ में ही मौजूद हैं। लखनऊ में ASIके 30 क्षेत्रों में से एकक्षेत्रमौजूद है तथा INTACHके भी 190 चैप्टरों में से एक चैप्टर को यहां स्थापित किया गया है। तो आइए आज इन संगठनों के उद्देश्यों और कार्यों को समझने की कोशिश करें। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की स्थापना 1861 में अलेक्जेंडर कनिंघम (Alexander Cunningham) ने की थी जो इसके पहले महानिदेशक भी थे। 1958 के प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल और अवशेष अधिनियम के प्रावधानों के तहत ASI, 3650 से अधिक प्राचीन स्मारकों, पुरातात्विक स्थलों और राष्ट्रीय महत्व के अवशेषों का प्रबंधन करता है। इनमें मंदिर, मस्जिद, चर्च, मकबरे,कब्रिस्तान आदि से लेकर महल, किले, सीढ़ीदार कुएं,रॉक-कट गुफाएं सब कुछ शामिल हो सकता है।ये प्राचीन आवास के अवशेषों का प्रतिनिधित्व करने वाले स्थलों के साथ-साथ प्राचीन टीलों और अन्य समान स्थलों का भी रखरखाव करते हैं। ASI को कुल 30 मंडलों में विभाजित किया गया है, तथा प्रत्येक का नेतृत्व एक अधीक्षण पुरातत्वविद् करते हैं।प्रत्येक क्षेत्र को आगे उप-क्षेत्रों में विभाजित किया गया है।संग्रहालयों, उत्खनन शाखाओं, प्रागितिहास शाखा, पुरालेख शाखाओं, विज्ञान शाखा, बागवानी शाखा, भवन सर्वेक्षण परियोजना, मंदिर सर्वेक्षण परियोजनाओं और अंडर वाटर पुरातत्व विंग के माध्यम से पुरातात्विक अनुसंधान परियोजनाओं के संचालन के लिए ASI संगठन के पास प्रशिक्षित पुरातत्वविदों, संरक्षकों, पुरालेखविदों, वास्तुकारों और वैज्ञानिकों का एक कार्यबल है। यह प्राचीन स्मारकों और पुरातत्व स्थलों और अवशेष अधिनियम, 1958 के प्रावधानों के अनुसार देश में सभी पुरातात्विक गतिविधियों को सौहार्दपूर्ण रूप से नियंत्रित करता है।यह पुरावशेष और कला निधि अधिनियम, 1972 को भी नियंत्रित करता है।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण का लखनऊ सर्कल या क्षेत्र 13 मई 1985 को स्थापित किया गया था।आज की स्थिति में, लखनऊ सर्कल के अधिकार क्षेत्र में 328 स्मारक या स्थल हैं, जिनकी देखरेख उत्तर प्रदेश के अवध, बुंदेलखंड और तराई क्षेत्र के कुछ हिस्सों सहित लखनऊ सर्कल के अधीक्षण पुरातत्वविद् द्वारा की जा रही है। इसी प्रकार से यदि INTACH की बात करें तो, इसकी स्थापना 1984 में राजीव गांधी द्वारा की गयी थी, जो इसके पहले अध्यक्ष भी थे। इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है, और आज 117 शहरों में इसके चैप्टर या खंड हैं। यह भारत का सबसे बड़ा गैर-लाभकारी सदस्यता संगठन है, जो भारत की प्राकृतिक, सांस्कृतिक, जीवित, मूर्त और अमूर्त विरासत के संरक्षण और सुरक्षा के लिए समर्पित है। इसका लक्ष्य भारत की बहुलवादी सांस्कृतिक विरासत के प्रति जनता को संवेदनशील बनाना,हमारी साझी विरासत के संरक्षण की दिशा में सामाजिक जिम्मेदारी की भावना उत्पन्न करना,आवश्यक कार्रवाई और उपाय करके हमारे जीवन, निर्मित और प्राकृतिक विरासत की रक्षा और संरक्षण करना,पुरातात्विक, स्थापत्य, ऐतिहासिक और सौंदर्य महत्व की असुरक्षित इमारतों का दस्तावेजीकरण करना,विरासत नीति और विनियम विकसित करना, और आवश्यकता पड़ने पर हमारी विरासत की रक्षा के लिए कानूनी हस्तक्षेप करना,कला के विशिष्ट कार्यों के संरक्षण, बहाली आदि के क्षेत्र में विशेषज्ञता प्रदान करना,और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से कौशल विकसित करके क्षमता निर्माण को प्रोत्साहित करना,प्राकृतिक या मानव निर्मित आपदाओं के दौरान आपातकालीन प्रतिक्रिया उपाय करना, और जब भी विरासत को खतरा हो तो स्थानीय प्रशासन का सहयोग करना आदि हैं।
INTACH से जुड़े लोगों का मार्गदर्शन करने के लिए INTACH चार्टर बनाए गए हैं, जो केवल असुरक्षित स्मारकों, ऐतिहासिक स्थलों और मूर्त और अमूर्त विरासत के अन्य पहलुओं से संबंधित है।स्वयंसेवकों का एक सदस्यता संगठन होने के नाते,INTACHअपने सदस्यों के बल पर कार्य करता है,जो एक चैप्टर से सम्बंधित हैं। चैप्टर एक प्रकार का फोरम है, जो INTACH द्वारा दिए गए अधिकार और निर्देशों के साथ गठित किए गए हैं। इसे लगभग 25 सदस्यों के साथ गठित किया गया है।एक चैप्टर में केंद्रीय कार्यालय द्वारा नियुक्त एक संयोजक और एक सह-संयोजक होता है और इसके कामकाज में समन्वय के लिए एक कार्यकारी समिति होती है। चैप्टर अपनी आंतरिक संरचना में एक लचीला दृष्टिकोण अपना सकता है, जब तक कि इसकी कानूनी और वित्तीय जवाबदेही प्रभावित न हो।केंद्रीय कार्यालय में चैप्टर डिवीजन सभी INTACH चैप्टर के कार्यों और गतिविधियों का समन्वय करता है और एक इंटरकनेक्टिंग ब्रिज के रूप में कार्य करता है। हालांकि यह ध्यान देने योग्य है,कि हमारे शहर में मुख्य लखनऊ संग्रहालय को राज्य सरकार द्वारा प्रबंधित किया जाता है।यह संग्रहालय वर्तमान में नवाब वाजिद अली शाह प्राणी उद्यान, बनारसी बाग, लखनऊ में स्थित है, जिसकी स्थापना 1863 में की गयी थी। यहां रखे गए संग्रह में प्रागैतिहासिक काल, कांस्य युग की वस्तुएं,सिंधु घाटी सभ्यता की प्रसिद्ध मूर्तियों केप्लास्टर कास्ट या सांचे,मुद्राशास्त्र, पेंटिंग, पांडुलिपियों और वस्त्रों के समृद्ध संग्रह आदि शामिल हैं। किंतु इन्हें न तो ASI द्वारा और न ही INTACH द्वारा प्रबंधित किया जाता है। लखनऊ INTACH चैप्टर का एक अपना फेसबुक पेज है और ASI लखनऊ की अपनी वेबसाइट है, जो लखनऊ जिले में उन परियोजनाओं की जानकारी देती हैं, जिन पर यह काम कर रहे हैं।

संदर्भ:
https://bit.ly/36nwD3p
https://bit.ly/3AOYaZE
https://bit.ly/3ALjW0c
https://bit.ly/3hUhwDM
https://bit.ly/3e0NZaB
https://bit.ly/3woBPP7
https://bit.ly/3xqdl9k

चित्र संदर्भ
1. बड़ा इमामबाड़ा, लखनऊ, भारत का एक चित्रण (wikimedia)
2. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के लोगो का एक चित्रण (wikimedia)
3. पुणे में INTACH समूह का एक चित्रण (wikimedia)



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