धोखाधड़ी का एक रूप है, पोंजी स्कीम

लखनऊ

 14-07-2021 10:31 AM
सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान

वर्तमान समय में ऐसे कई किस्से सामने आते हैं, जहां कंपनियां या कोई व्यक्ति निवेशकों की जमा पूंजी लेकर गायब हो जाते हैं,और परिणामस्वरूप निवेशकों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ता है। कुछ इस तरह की घटनाओं या घोटालों को पोंजी स्कीमों (Ponzi schemes) के तहत रखा गया है।पोंजी स्कीम,धोखाधड़ी का एक रूप है,जो नए-नए निवेशकों को आकर्षित करती है और उनके द्वारा निवेश किए गए धन का इस्तेमाल प्रथम चरण के निवेशकों को कथित रिटर्न का भुगतान करने के लिए करती है। इस योजना में निवेशकों को यह विश्वास दिलाया जाता है, कि उनको होने वाला लाभ वैध व्यावसायिक गतिविधि (जैसे, उत्पाद की बिक्री या सफल निवेश) से होता है, जबकि निवेशक इस बात से अनजान रहते हैं कि स्कीम में अन्य निवेशक ही धन के स्रोत होते हैं। कोई धोखेबाज या ‘हब’निवेशकों को यह कह कर आकर्षित करता है, कि निवेश करने पर उन्हें कुछ बड़ा फायदा होगा, किंतु वास्तव में वे नए निवेशकों से पैसा इकट्ठा करता है और उस पैसे का इस्तेमाल पहले चरण के निवेशकों को लाभ देने के लिए करता है। एक पोंजी स्कीम इस स्थायी व्यवसाय के भ्रम को तब तक बनाए रख सकती है जब तक कि नए निवेशक नए फंड का योगदान करते रहते हैं, तथा जब तक अधिकांश निवेशक पूर्ण पुनर्भुगतान की मांग नहीं करते हैं। पोंजी योजना की कुछ आधुनिक घटनाओं को पहली बार 1880 के दशक में दर्ज किया गया था, जो 1869 से 1872 तक जर्मनी (Germany) में एडेल स्पिट्जर (Adele Spitzeder) द्वारा और संयुक्त राज्य अमेरिका (United States) में सारा होवे (Sarah Howe) द्वारा "लेडीज डिपॉजिट" के माध्यम से संचालित की गयी थी। हॉवे ने केवल महिला ग्राहकों को 8% मासिक ब्याज दर की पेशकश की, और फिर महिलाओं द्वारा निवेश किए गए धन को चुरा लिया।पोंजी योजना को पहले भी उपन्यासों में वर्णित किया गया था जैसे चार्ल्स डिकेंस (Charles Dickens) के 1844 के एक उपन्यास मार्टिन चज़लेविट (Martin Chuzzlewit) और 1857 के उपन्यास लिटिल डोरिट (Little Dorrit) में ऐसी ही एक योजना का उल्लेख मिलता है।
इस योजना का नाम 1920 के दशक के एक चोर अपराधी चार्ल्स पोंजी (Charles Ponzi) के नाम पर रखा गया है, जिसने हजारों लोगों को डाक टिकटों वाली एक जटिल योजना में निवेश करने के लिए राजी किया तथा लोगों से भारी मात्रा में धन लूटने के कारण वह पूरे संयुक्त राज्य में प्रसिद्ध हुआ। उसकी मूल योजना डाक टिकटों के लिए अंतरराष्ट्रीय रिप्लाई कूपन की वैध मध्यस्थता पर आधारित थी, लेकिन उसने जल्द ही नए निवेशकों के पैसे को पुराने निवेशकों और खुद को भुगतान करने में लगाना शुरू कर दिया। पहले की इसी तरह की योजनाओं के विपरीत, पोंजी ने संयुक्त राज्य के भीतर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी प्रेस कवरेज प्राप्त की। पिरामिड योजनाओं की तरह, पोंजी योजनाओं को चालू रखने के लिए निरंतर आने वाली नकदी की आवश्यकता होती है। लेकिन पिरामिड योजनाओं के विपरीत, पोंजी योजना में निवेशकों को आम तौर पर ‘लाभ’ अर्जित करने के लिए नए निवेशकों को भर्ती करने की आवश्यकता नहीं होती। पोंजी योजनाएं तब ध्वस्त हो जाती हैं,जब हब में जालसाज नए निवेशकों को आकर्षित नहीं कर पाता या जब बहुत सारे निवेशक अपना पैसा निकालने का प्रयास करते हैं - उदाहरण के लिए, अशांत आर्थिक समय के दौरान। इतिहास में अभी तक की सबसे बड़ी पोंजी योजना को अंजाम देने के लिए फाइनेंसर बर्नी मैडॉफ (Bernie Madoff) को दोषी ठहराया गया था। उनके द्वारा किए गए घोटाले में समाज के हर तबके के लोग शामिल थे, जिसमें सबसे गरीब व्यक्ति से लेकर उच्च और शक्तिशाली व्यक्ति तक सम्मिलित थे। ट्रेडिंग सिक्योरिटीज होने का नाटक करते हुए, मैडॉफ एक पोंजी योजना चला रहे थे। उन्होंने अपने ग्राहकों को निरंतर और दुगुने रिटर्न का वादा करके आकर्षित किया, जबकि वास्तव में वह पुराने निवेशकों को पैसे वापस करने के लिए नए निवेशकों की नकदी का उपयोग कर रहे थे। 1990 के दशक में एक गंभीर मंदी, 1998 में एक वैश्विक वित्तीय संकट और 9/11 के हमलों के झटके के बाद भी मैडॉफ कई वर्षों तक निवेशकों के साथ धोखाधड़ी करते रहे। उनकी पोंजी योजना का पर्दाफाश 2008 में हुआ, जब आय के नए स्रोत सूखने के कारण निवेशकों ने अपना पैसा निकालना शुरू कर दिया। भारत में इस तरह की पोंजी स्कीम निर्मल सिंह भंगू से जुड़ी हुई है, जो कि करीब तीन दशक पहले पंजाब के अटारी में भारत-पाकिस्तान सीमा के पास एक दूध बेचने वाला व्यक्ति था। 1996 में, उन्होंने पीएसीएल लिमिटेड की स्थापना की (जिसे तब गुरवंत एग्रोटेक (Gurwant Agrotech) के नाम से जाना जाता था)। कंपनी की वेबसाइट के अनुसार, पीएसीएल जल्द ही रियल एस्टेट और हॉस्पिटैलिटी में बदलने लगा।पूरे भारत में वह 183,000 एकड़ से अधिक भूमि के मालिक बने, लेकिन उनका व्यापारिक साम्राज्य तब संकट में आया, जब उन्हें भारत की संघीय जांच एजेंसी, केंद्रीय जांच ब्यूरो द्वारा कथित रूप से 45,000 करोड़ रुपये के पोंजी घोटाले के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया। भारत में पोंजी स्कीम का एक अन्य उदाहरण अनुभव प्लांटेशन (Anubhav Plantations) से भी सम्बंधित है, जिसकी स्थापना 1992 में हुई थी। इसने गारंटीकृत हितों पर सागौन के बागानों में शेयर बेचे और बाद में चार प्रमुख कंपनियों अनुभव एग्रोटेक (Anubhav Agrotech), अनुभव ग्रीन फार्म्स एंड रिसॉर्ट्स (Anubhav Green Farms & Resorts), अनुभव प्लांटेशन (Anubhav Plantation) और अनुभव रॉयल ऑर्चर्ड्स एक्सपोर्ट्स (Anubhav Royal Orchards Exports) की शुरूआत की। कंपनी 1998 में अचानक बंद हो गई जब वह अपने जमाकर्ताओं को भुगतान नहीं कर सकी, जिससे उसके हजारों निवेशकों के पैसे डूब गए। यह घटना भारत में एक बड़ा वित्तीय घोटाला बनी। अनुभव ने पोंजी योजनाओं के माध्यम से अपने जमाकर्ताओं को लगभग 400 रुपये करोड़ का धोखा दिया था। पोंजी घोटाले की एक घटना कुछ समय पूर्व अहमदाबाद में भी सामने आई, जहां पुलिस द्वारा तीन लोगों को गिरफ्तार कर एक पोंजी योजना का खुलासा किया गया। ये तीनों लोग वस्त्रपुर के अपने कार्यालय 'गेम्स फॉर विक्ट्री' प्राइवेट लिमिटेड (Games for Victory' Private Limited) से कथित तौर पर एक पोंजी योजना चला रहे थे। वे विक्टरी वर्ल्ड (Victory world) नामक एक मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग कर रहे थे,जिसमें ग्राहकों को पैसा निवेश करने के लिए यह वादा कर प्रोत्साहित किया गया कि उन्हें निवेश पर प्रतिदिन एक प्रतिशत की दर से रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट (Return on investment) की सुविधा प्राप्त होगी। इस घोटाले में 30 लाख रुपये से अधिक का लेनदेन किया था जिसमें सैकड़ों ग्राहक शामिल थे।
अपनी पूंजी को इस तरह की योजनाओं से बचाने के लिए आपमें एक संदेहपूर्ण प्रवृति का होना अत्यंत आवश्यक है। अगर कोई आपको ऐसा निवेश बेचने की कोशिश करता है, जिसमें बहुत कम या बिना किसी जोखिम के बहुत अधिक या तत्काल रिटर्न होता है, तो इसमें किसी प्रकार की धोखाधड़ी शामिल हो सकती है। यदि कोई आपको बार-बार एक निवेश संगोष्ठी में आमंत्रित करने के लिए अप्रत्याशित रूप से संपर्क कर रहा है, तो यह खतरे का चिन्ह हो सकता है। निवेश घोटाले अक्सर बुजुर्ग लोगों, या सेवानिवृत्ति के करीब या उससे निकट के लोगों को लक्षित करते हैं। वित्तीय उद्योग नियामक प्राधिकरण के ब्रोकरचेक का उपयोग करके ब्रोकर, वित्तीय सलाहकार, ब्रोकरेज कंपनी और निवेश सलाहकार फर्म पर शोध किया जा सकता है। सत्यापित करें कि पेशेवर लाइसेंस प्राप्त है और उनसे सम्बंधित नकारात्मक जानकारी की तलाश करें। पोंजी योजनाओं में अक्सर अपंजीकृत निवेश शामिल होते हैं, इसलिए यह सुनिश्चित करें, कि निवेश पंजीकृत है या नहीं। कभी भी ऐसे निवेश में पैसा न लगाएं जिसे आप पूरी तरह से नहीं समझते हैं। निवेश करने के तरीके और जोखिम और संभावित लाभ के अवसरों का मूल्यांकन करने के तरीके सीखने में आपकी मदद करने के लिए कई ऑनलाइन संसाधन भी मौजूद हैं, जिसमें इन्वेस्टोपेडिया (Investopedia) भी शामिल है।

संदर्भ:

https://bit.ly/2UIQF5y
https://bit.ly/3r3uTps
https://bit.ly/3k7LDu8
https://bit.ly/2VB724Z
https://bit.ly/3hXYU5T

चित्र संदर्भ
1. पोंजी स्कीम के विभिन्न चरणों को दर्शाता एक चित्रण (bioplasticsnews)
2. बिटकॉइन का एक चित्रण (social)
3. ग्राफ पोंजी फंडों के उदय के साथ सरकारी योजनाओं में बचत में गिरावट को दर्शाता है (y अक्ष पर आंकड़े करोड़ रुपये में हैं) जिसका एक चित्रण (wikimedia)



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