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खूबसूरत लखनऊ लेस की तीन मुख्य शैलियाँ और उनका इतिहास

लखनऊ

 03-09-2021 10:30 AM
स्पर्शः रचना व कपड़े

मशीन या हाथ से खुले जाल जैसे प्रतिरूप में धागे से बने नाजुक कपड़े को लेस (Lace) कहा जाता है। इन्हें बनाने के लिए मूल रूप से लिनन (Linen), रेशम, सोना या चांदी के धागों का उपयोग किया जाता था। अब लेस अक्सर सूती धागे से बनाई जाती है, हालांकि लिनन और रेशम के धागे अभी भी उपयोग किए जाते हैं। निर्मित लेस सिंथेटिक फाइबर (Synthetic fiber) से बना हो सकता है। कुछ आधुनिक कलाकार धागे के बजाय महीन तांबे या चांदी के तार से लेस बनाते हैं।
लखनऊ में लेस (लेस शब्द मध्य अंग्रेजी से लिया गया है,यानी पुरानी फ्रांसीसी से लास (Las), नोज (Noose), स्ट्रिंग (String); अनौपचारिक लैटिन (Latin) सेलेसियम(Laceum), लैटिन लैक्यूस (Latin laqueus) सेनोज से लिया गया है।) को तैयार करने की मुख्य तीन शैली पाई जाती हैं।जिसमें पहली लेस एक धातु की शैली में बनाई जाती है,जिसे चरखे पर खूँटी या सुइयों का उपयोग करके हस्तनिर्मित लेस की शैली में चुन्नट की तरह बुना जाता है, हालांकि इसे कुछ लेखकों द्वारा अंग्रेजी में'लखनऊ लेस' लिखा जाता है।
दूसरी लेस शैली बॉबिन (Bobbin) लेस, क्रोशिया लेस, सुई लेस, आदि में उपलब्ध होती है। इस प्रकार की लेस शैली अठारहवीं शताब्दी के बाद से ईसाई नन (Christian nun) और मिशनरियों के विभिन्न समूहों द्वारा भारत लाई गई थी।
लखनऊ की तीसरी प्रकार की लेस शैली, एक खींचे गए धागे की तकनीक का उपयोग करके सफेद कढ़ाई से बनाई जाती है, जिसे आमतौर पर चिकन के रूप में जाना जाता है।इस प्रकार की कढ़ाई शैली कोणीय होती है और इसमें अक्सर भारतीय रूपांकनों जैसे कि बुटेह (Buteh), उष्णकटिबंधीय पौधे और हाथी सहित जीव-जंतु शामिल होते हैं।आमतौर पर, लेस को दो मुख्य श्रेणियों, सुई लेस और बॉबिन लेस में विभाजित किया जाता है।अन्य प्रकार की लेस में क्रोशिया लेस और बुनी हुई लेस आती हैं।
1. बॉबिनलेस : जैसा कि नाम से पता चलता है, इस लेस को बॉबिन और तकिए से बनाया जाता है। लकड़ी, हड्डी, या प्लास्टिक (Plastic) से बने बॉबिन, धागे को पकड़ते हैं जो एक साथ तकिये पर पिन से चिपकाए गए पैटर्न को बुनते हैं। इसे हड्डी लेस के रूप में भी जाना जाता है। चान्तिली लेस एक प्रकार की बोबिनलेस है।
2. क्रोशियालेस में आयरिश (Irish)क्रोशिया, अनानास क्रोशिया और फ़िले (Filet)क्रोशिया शामिल हैं।
3. कटवर्क (Cutwork) एक बुना हुआ पृष्ठभूमि से धागे को हटाकर बनाई गई लेस होती है, और इसमें शेष धागे लपेटे या कढ़ाई से भरे हुए होते हैं।
4. बुनी हुई लेस में शेटलैंड (Shetland)लेस शामिल है, जैसे "शादी की अंगूठी शॉल", यह लेस शॉल इतनी महीन होती है कि इसे शादी की अंगूठी के माध्यम से खींचा जा सकता है।
5. मशीन-निर्मित लेस यांत्रिक साधनों का उपयोग करके बनाई या दोहराई गई लेस की शैली है।
6. सुई लेस, जैसे विनीशियन ग्रोसपॉइंट (Venetian Gros Point), सुई और धागे का उपयोग करके बनाया जाता है। यह लेस बनाने वाली कलाओं में सबसे लचीली है।
लेस की उत्पत्ति इतिहासकारों द्वारा विवादित है।एक इतालवी का दावा है कि यह मीलान-निवासी स्फ़ोर्ज़ा परिवार (Sforza Family, Milan) की 1493 की वसीयत है। वहीं फ्लैंडर्स दावा करते हैं कि हैन्स मेमलिंग (Hans Memling) द्वारा लगभग 1485 की पेंटिंग में एक पूजा करने वाले पुजारी के सफेद जामा पर लेस मौजूद है।लेकिन चूंकि लेस अन्य तकनीकों से विकसित हुई है, इसलिए यह कहना असंभव है कि इसकी उत्पत्ति किसी एक स्थान पर हुई है। लेस की नाजुकता हमें यह भी बताती है कि इनके कुछ बहुत पुराने नमूने भी मौजूद हैं। प्रारंभिक कैथोलिक चर्च (Catholic Church) के पादरियों द्वारा धार्मिक समारोहों में वेशभूषा के भाग के रूप में लेस का उपयोग किया जाता था। जब उन्होंने पहली बार लेस का उपयोग करना शुरू किया और 16 वीं शताब्दी तक उन्होंने मुख्य रूप से कटवर्क (Cutwork)का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया।उनकी अधिकांश लेस सोने, चांदी और रेशम की बनी होती थी।संपन्न लोग कपड़ों के अलंकरण और कुशन कवर (Cushion cover) जैसे साज- सज्जा में इस तरह की महंगी लेस का इस्तेमाल करने लगे। इटालियन राज्यों में 1300 और 1400 के दशक में लेस पर भारी शुल्क लगाया गया था, और सख्त व्यय विषयक कानून पारित किए गए थे।इससे लेस की मांग कम हो गई।
1400 के दशक के मध्य में कुछ लेस निर्माताओं ने पटसन का उपयोग करना शुरू कर दिया, जिसकी लागत कम थी, जबकि अन्य ने पलायन किया तथा उद्योग को दूसरे देशों में लेकर आए। हालांकि, यूरोपीय (European) महाद्वीप के उत्तर-पश्चिमी भाग में 16वीं शताब्दी तक फीता का व्यापक उपयोग नहीं हुआ था।लेकिन धीरे धीरे लेस की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी और लेस बनाने का कुटीर उद्योग पूरे यूरोप में फैल गया। 16 वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में लेस के तेजी से विकास को चिह्नित किया गया, सुई लेस और बॉबिनलेस दोनों फैशन (Fashion) के साथ-साथ घर की सजावट में भी प्रभावी हो गए।1400 के दशक की शुरुआत में बॉबिन और सुई लेस दोनों इटली (Italy) में बनाए जा रहे थे।
वेनिस (Venice) में, लेस बनाना मूल रूप से अवकाश प्राप्त कुलीन महिलाओं का प्रांत था, इसे एक मनोरंजन के रूप में उपयोग किया जाता था। वेनिस के मुख्य मजिस्ट्रेट की कुछ पत्नियों ने भी गणतंत्र में लेस बनाने का समर्थन किया। साथ ही 1400 के दशक में ब्रुसेल्स (Brussels) में लेस बनाया जा रहे थे, और इस तरह के लेस के नमूने आज भी हमारे समक्ष मौजूद हैं। 1500 के दशक में शुरू होने वाले मुख्य रूप से बॉबिनलेस के निर्माण के लिए बेल्जियम (Belgium) और फ़्लैंडर्स (Flanders) एक प्रमुख केंद्र बन गए, और यहाँ आज भी कुछ हस्तनिर्मित लेस का उत्पादन किया जा रहा है। हस्तनिर्मित लेस कई प्रकार में आती है, जो बहुत अलग-अलग उपकरणों का उपयोग करके बहुत अलग तरीके से बनाई जाती हैं। वास्तव में जटिल टुकड़े बनाने के लिए पर्याप्त कौशल विकसित करने में काफी प्रयास और समय लगता है। वहीं भारत के दक्षिणी सिरे पर शहर कन्याकूमारी में, कढ़ाई के साथ लेस के निर्माण की तकनीक बेल्जियम और इंग्लैंड (England) के ईसाई मिशनरियों द्वारा लाया गया था।ईसाई परिवारों में, छोटी महिलाओं को यह कौशल उनकी मां और दादी से विरासत में मिलती है।कम लागत वाले श्रम के साथ भी, इसे हाथ से बनाना एक कठिन व्यवसाय है। वहीं काम की जटिलता और पूरा होने में लगने वाले समय के आधार पर इनकी 250 रुपये से लेकर 5000 रुपये तक की कीमत होती है। लेस शिल्प विभिन्न प्रकार के उत्पादों जैसे कुशन (Cushion) के कवर, रूमाल, बैग (Bags), हेडबैंड (Headbands), ज्वेलरीबॉक्स (Jewellery boxes), टेबलमैट (Table mat) आदि पर किया जाता है।

संदर्भ :
https://bit.ly/3jFgEVI
https://bit.ly/3gZecHM
https://bit.ly/2WH5hDI
https://bit.ly/3yPCo5P

चित्र संदर्भ
1. बेल्जियम लेस के कपड़े का एक चित्रण (flickr)
2. लेस के कपड़े के निर्माण का एक चित्रण (istock)
3. लेस के कपड़े पहने हुए युवती का एक चित्रण (flickr)
4. चौकोर लेस के कपड़े का एक चित्रण (wikimedia)



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