Post Viewership from Post Date to 08-Dec-2021 (30th Day)
City Subscribers (FB+App) Website (Direct+Google) Email Instagram Total
1148 206 1354

***Scroll down to the bottom of the page for above post viewership metric definitions

भारत में वित्तीय समावेशन की परिभाषा और आवश्यकता

लखनऊ

 09-10-2021 05:39 PM
सिद्धान्त I-अवधारणा माप उपकरण (कागज/घड़ी)

वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) को‚ वित्तीय सेवाओं की प्रक्रिया के रूप में परिभाषित किया जा सकता है‚ जहां कमजोर वर्गों और कम आय वाले समूहों को‚ किफायती लागत में‚ आवश्यक समय पर‚ पर्याप्त ऋण की आवश्यकता होती है। वित्तीय समावेशन‚ उचित लागत पर वित्तीय सेवाओं की एक विस्तृत श्रृंखला तक सार्वभौमिक पहुंच को संदर्भित करता है। इनमें बैंकिंग उत्पाद के अलावा अन्य वित्तीय सेवाएं जैसे; बीमा और इक्विटी उत्पाद भी शामिल हैं। वित्तीय समावेशन का सार वित्तीय सेवाओं के वितरण को सुनिश्चित करना है‚ जिसमें; बचत और लेन- देन के उद्देश्यों के लिए बैंक खाते‚ उत्पादक‚ व्यक्तिगत और अन्य उद्देश्यों के लिए कम लागत वाला ऋण‚ वित्तीय सलाहकार सेवाएं‚ बीमा सुविधाएं आदि शामिल हैं।
वित्तीय समावेशन‚ ग्रामीण आबादी के बड़े हिस्से के बीच बचत की संस्कृति विकसित करके‚ वित्तीय प्रणाली के संसाधन आधार को विस्तृत करता है और आर्थिक विकास की प्रक्रिया में अपनी भूमिका निभाता है। इसके अलावा‚ निम्न आय समूहों को औपचारिक बैंकिंग क्षेत्र की परिधि में लाकर‚ उनके वित्तीय धन और अन्य संसाधनों की अत्यावश्यक परिस्थितियों में रक्षा करता है। यह औपचारिक ऋण तक पहुंच को सुगम बनाकर‚ सूदखोर साहूकारों द्वारा कमजोर वर्गों के शोषण को भी कम करता है।
भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्तीय समावेशन प्राप्त करने के लिए एक बैंक के नेतृत्व वाले मॉडल को अपनाया है‚ और देश में अधिक वित्तीय समावेशन प्राप्त करने में सभी नियामक बाधाओं को दूर किया है। इसके अलावा‚ लक्षित उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए‚ आरबीआई ने अनुकूल नियामक वातावरण बनाया है‚ और बैंकों को उनके वित्तीय समावेशन प्रयासों में तेजी लाने के लिए संस्थागत सहायता प्रदान की है। सभी बैंकों को न्यूनतम सामान्य सुविधाओं के साथ‚ बेसिक सेविंग बैंक डिपॉजिट (बीएसबीडी) (Basic Saving Bank Deposit (BSBD)) खाते खोलने की सलाह दी‚ जैसे; कोई न्यूनतम शेष राशि नहीं‚ बैंक शाखा और एटीएम (ATMs) में नकद जमा और निकासी‚ इलेक्ट्रॉनिक भुगतान प्रणाली के माध्यम से रसीद और धन की प्राप्ति‚ एटीएम कार्ड प्रदान करने की सुविधा। बैंक खातों को आसानी से खोलने की सुविधा के लिए केवाईसी (KYC) मानदंडों में ढील और सरलीकृत‚ विशेष रूप से छोटे खातों के लिए‚ जिनकी शेष राशि 50‚000 रुपये से अधिक नहीं होती‚ और खातों में कुल क्रेडिट प्रति वर्ष एक लाख रुपये से अधिक नहीं होता। इसके अलावा‚ बैंकों को सूचित किया जाता है कि वे ग्राहकों के बैंक खाते खोलने के लिए परिचय पर जोर न दें‚ बैंकों को पहचान और पते दोनों के प्रमाण के रूप में आधार कार्ड का उपयोग करने की अनुमति है। सरलीकृत शाखा प्राधिकरण नीति‚ असमान प्रसार वाली बैंक शाखाओं के मुद्दे को संबोधित करने के लिए‚ घरेलू अनुसूचित सहकारी बैंकों को सामान्य अनुमति के तहत‚ 1 लाख से कम आबादी वाले‚ टियर 2 से टियर 6 केंद्रों में स्वतंत्र रूप से शाखाएं खोलने की अनुमति है‚ जो रिपोर्टिंग के अधीन है। गैर-बैंकिंग गांवों में शाखाएं खोलने की अनिवार्य आवश्यकता के तहत‚ बैंकों को निर्देश दिया जाता है कि वे वर्ष के दौरान खोले जाने वाली शाखाओं की कुल संख्या का कम से कम 25% गैर-बैंकिंग ग्रामीण केंद्रों में आवंटित करें।
वित्तीय प्रौद्योगिकी (Financial technology)‚ जिसे लघु रूप में फिनटेक (Fintech) कहा जाता है‚ भारत में अधिक वित्तीय समावेशन का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं‚ यह एक उभरता हुआ उद्योग है‚ जो वित्त में गतिविधियों को बेहतर बनाने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करता है। फिनटेक संगठनों का भारत में व्यापार का व्यापक दायरा है‚ विशेष रूप से भुगतान उधार‚ व्यक्तिगत वित्त प्रबंधन और विनियमन प्रौद्योगिकियों में। राष्ट्रों की विशाल आबादी‚ वेब उपयोगकर्ताओं की संख्या में वृद्धि‚ और देश को डिजिटल बनाने के सरकार के प्रयास‚ फिनटेक और नई कंपनियों के लिए कई नए अवसर ला रहे हैं। वित्तीय संगठन‚ नए व्यवसाय‚ निवेशक और नियंत्रक फिनटेक को स्वीकार कर रहे हैं‚ और उन अवसरों का उपयोग प्रतिस्पर्धा में खड़े होने और तेजी से बढ़ने के लिए कर रहे हैं। हाल के वर्षों में‚ भारत ने विभिन्न नए स्टार्ट-अप‚ नियामकों‚ सार्वजनिक और निजी वित्तीय संस्थानों के विकास को देखा गया है‚ जिन्होंने भारतीय फिनटेक बाजार को दुनिया में सबसे तेजी से विकासशील व्यावसायिक क्षेत्र बना दिया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (artificial intelligence)‚ मशीन लर्निंग (machine learning)‚ डेटा विश्लेषण‚ स्वचालन प्रक्रिया और ब्लॉकचैन (Blockchain) द्वारा संचालित‚ फिनटेक प्रौद्योगिकियों को अपनाने ने वित्तीय दुनिया को बदल दिया है। ये प्रगति‚ फिनटेक को पैटर्न और जोखिम‚ नकली प्रथाओं‚ स्पैम सूचनाओं में अंतर करने और सही कदम उठाने या सुझाव देने के लिए डिज़ाइन की गई गणनाओं के माध्यम से सूचना के विशाल उपायों को चलाने के लिए सशक्त बनाती है। फिनटेक संगठन‚ इन नवाचारों का उपयोग संगठनों को अपने वित्त के प्रबंधन और नियंत्रण‚ कर अनुपालन को पूरा करने‚ बिलों का भुगतान और स्वीकार करने और आवश्यकताओं के अनुसार अन्य वित्तीय प्रशासनों का उपयोग करने जैसी गतिविधियों के प्रबंधन और नियंत्रण में सहायता करने के लिए करते हैं। वे अतिरिक्त रूप से ग्राहकों‚ संगठनों और उद्यमियों को निवेश और खरीद जोखिम की बेहतर समझ रखने के लिए सशक्त बनाते हैं। भारत में तेजी से बढ़ते यूपीआई (UPI) भुगतानों के बीच वित्तीय समावेशन पीछे रह गया है। भारत में‚ यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) (Unified Payments Interface (UPI)) परिदृश्य पिछले आधे दशक में काफी बढ़ा है‚ और पिछले कुछ महीनों में महामारी के प्रकोप के बाद से और भी ज्यादा बढ़ गया है। अप्रैल 2020 से अगस्त 2021 तक‚ भारत में यूपीआई लेनदेन का कुल मूल्य 68.81 लाख करोड़ रुपये था‚ जो अप्रैल 2016 में अपनी स्थापना के बाद से किए गए यूपीआई लेनदेन के कुल मूल्य का लगभग 69 प्रतिशत है। जब से अप्रैल 2016 में तत्कालीन आरबीआई (RBI) गवर्नर रघुराम राजन द्वारा यूपीआई को एक पायलट के रूप में लॉन्च किया गया था‚ तब से यूपीआई सिस्टम ने लेनदेन की संख्या और तत्काल भुगतान को संसाधित करने के लिए कुल मूल्य में भारी वृद्धि देखी है।
अपनी स्थापना से अगस्त 2021 तक‚ भारत ने यूपीआई लेनदेन के माध्यम से कुल 100 लाख करोड़ रुपये का मूल्य दर्ज किया है। यूपीआई प्रणाली ने खुद को‚ प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया के सपने को आगे बढ़ाने और इसे कैशलेस अर्थव्यवस्था में बदलने के लिए एक उत्प्रेरक के रूप में प्रस्तुत किया है‚ भारत के वित्तीय समावेशन के बारे में नवीनतम आंकड़े बताते हैं कि इस सपने को हकीकत में बदलने के लिए आगे संभावनाएं हो सकती है। किसानों और डेयरी श्रमिकों जैसी आबादी के बड़े समूहों को उपयुक्त वित्तीय उत्पाद उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। यह वह जगह है जहां आरबीआई का नवाचार हब सुरक्षित‚ किफायती और उपयुक्त वित्तीय उत्पादों के माध्यम से एक महान उपभोक्ता अनुभव प्रदान करने के लिए ‌रू‌‌ख कर रहे हैं। आरबीआईएच (RBIH) के आंकड़ों के अनुसार‚ सभी शहरी और ग्रामीण इंटरनेट उपयोगकर्ताओं में से केवल 43 प्रतिशत ही इंटरनेट पर सक्रिय हैं‚ और भारतीय आबादी के इस सबसेट का केवल 46 प्रतिशत ही सक्रिय रूप से डिजिटल भुगतान विधियों का उपयोग कर रहा है। यह कम डिजिटल और बैंकिंग पैठ का अनुवाद करता है‚ अर्थात 5 में से केवल 1 भारतीय‚ सक्रिय रूप से डिजिटल भुगतान का उपयोग कर रहा हैं। अधिकांश भारतीय ग्राहक अभी भी यूपीआई (UPI) लेनदेन जैसे तकनीक-संचालित विकल्पों के बजाय नकदी का उपयोग कर रहे हैं। पारंपरिक भारतीय खरीदारों को डिजिटल भुगतान को अपनाने के लिए प्रेरित करना भी वित्तीय समावेशन या फिनटेक के लिए एक महत्वपूर्ण रोड़ा है। नकदी पर निर्भरता‚ साइबर अपराध और खराब इंटरनेट सेवाओं वाले क्षेत्रों के कारण भी भारत वित्तीय समावेशन में पिछड़ा हुआ है।

संदर्भ:
https://bit.ly/3avrqIZ
https://bit.ly/3Dn0Pd9
https://bit.ly/3Dpo9Y5

चित्र संदर्भ
1. वित्तीय समावेशन मंच का प्रयोग करती महिला का एक चित्रण (forbs)
2. मास्टरकार्ड और सेवा सहयोग को दर्शाता एक चित्रण (flickr)
3. (बीएसबीडी) (Basic Saving Bank Deposit (BSBD) खाते खोलने की सलाह दी‚ जैसे; कोई न्यूनतम शेष राशि नहीं‚ को संदर्भित करता एक चित्रण (Tribune India)
4. विभिन्न UPI भुगतान माध्यमों को दर्शाता एक चित्रण (techcrunch)



***Definitions of the post viewership metrics on top of the page:
A. City Subscribers (FB + App) -This is the Total city-based unique subscribers from the Prarang Hindi FB page and the Prarang App who reached this specific post. Do note that any Prarang subscribers who visited this post from outside (Pin-Code range) the city OR did not login to their Facebook account during this time, are NOT included in this total.
B. Website (Google + Direct) -This is the Total viewership of readers who reached this post directly through their browsers and via Google search.
C. Total Viewership —This is the Sum of all Subscribers(FB+App), Website(Google+Direct), Email and Instagram who reached this Prarang post/page.
D. The Reach (Viewership) on the post is updated either on the 6th day from the day of posting or on the completion ( Day 31 or 32) of One Month from the day of posting. The numbers displayed are indicative of the cumulative count of each metric at the end of 5 DAYS or a FULL MONTH, from the day of Posting to respective hyper-local Prarang subscribers, in the city.

RECENT POST

  • अत्यधिक कठिन, महंगा और अवैध भी है कछुओं की कई प्रजातियों को घर में पालना
    निवास स्थान

     02-12-2021 08:44 AM


  • भारत में चुनावी प्रक्रिया एवं संयुक्त राज्य अमेरिका से इसकी तुलना
    आधुनिक राज्य: 1947 से अब तक

     01-12-2021 09:10 AM


  • अंग्रेजी शब्द कोष में Pyjama आया है हिंदी-उर्दू शब्द पायजामा से
    ध्वनि 2- भाषायें

     30-11-2021 10:37 AM


  • अवध के पूर्व राज्यपाल एलामा ताफज़ुल हुसैन के पारंपरिक भारतीय विज्ञान पर लेख व् पुस्तकें
    मध्यकाल 1450 ईस्वी से 1780 ईस्वी तक

     29-11-2021 09:06 AM


  • 1999 में युक्ता मुखी को मिस वर्ल्ड सौंदर्य प्रतियोगिता का ताज पहनाया गया
    द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

     28-11-2021 01:04 PM


  • भारत में लोगों के कुल मिलाकर सबसे अधिक मित्र होते हैं, क्या है दोस्ती का तात्पर्य?
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     27-11-2021 10:17 AM


  • शीतकालीन खेलों के लिए भारत एक आदर्श स्थान है
    य़ातायात और व्यायाम व व्यायामशाला

     26-11-2021 10:26 AM


  • प्राचीन भारत के बंदरगाह थे दुनिया के सबसे व्यस्त बंदरगाहों में से एक
    ठहरावः 2000 ईसापूर्व से 600 ईसापूर्व तक

     25-11-2021 09:43 AM


  • धार्मिक किवदंतियों से जुड़ा हुआ है लखनऊ के निकट बसा नैमिषारण्य वन
    छोटे राज्य 300 ईस्वी से 1000 ईस्वी तक

     24-11-2021 08:59 AM


  • कैसे हुआ सूटकेस का विकास ?
    य़ातायात और व्यायाम व व्यायामशाला

     23-11-2021 11:18 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id