लखनऊ की अस्थिकला

लखनऊ

 06-04-2017 12:00 AM
घर- आन्तरिक साज सज्जा, कुर्सियाँ तथा दरियाँ
हड्डियों के ऊपर तथा उनको उकेर कर कि जाने वाली शिल्पकारी विश्व के कई भागों मे पायी जाती है। स्पेन के अल्तमिरा व भारत के मिर्ज़ापुर से प्राप्त हड्डियों कि बनी मूर्तियाँ कदाचित विश्व कि प्राचीनतम मूर्तियों मे से एक हैं जो कि अस्थिशिल्प को प्रदर्शित करती है। अस्थि शिल्पकला प्राचीनतम समय से लेकर आधुनिक जगत तक अनवरत चली आ रही है। भारत मे विभिन्न स्थानों पर अस्थि शिल्प के कई रूप हैं। इसी कड़ी मे लखनऊ मे अस्थि कला का आगमन करीब ३०० वर्ष पूर्व लाहौर से आये कारीगरों ने शुरू किया। जालीदार कला यहाँ कि विशेषता है तथा अन्य कई प्रकार के अस्थि से बने शिल्प यहाँ कि शिल्पकला कि पराकाष्ठा को प्रदर्शित करते हैं। वर्तमान परिस्थितियों मे हाथी दांत को बंद कर दिए जाने के बाद यहाँ के शिल्पकार भैंस व ऊंट कि अस्थियों से शिल्प का निर्माण करते हैं। यहाँ के शिल्पकार वंशानुगत अस्थि शिल्पकारी का ही काम करते हैं। 1. मार्ग, लखनऊ- देन एंड नाउ, संस्करण ५५-१, २००३

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