पेरिस में दफ्न लखनऊ (अवध) की रानी

लखनऊ

 13-01-2018 02:40 PM
उपनिवेश व विश्वयुद्ध 1780 ईस्वी से 1947 ईस्वी तक

लखनऊ के इतिहास और इसके सम्बन्धों को कई परतों में देखा जा सकता है ऐसा ही एक सम्बन्ध पेरिस के एक कब्रिस्तान से है। यह कब्रिस्तान कई महान हस्तियों के लिये जाना जाता है जिसमें जिम मॉरिसन बेहतरीन अंग्रेजी गायक भी शामिल हैं ऑस्कर वाइल्ड व अन्य कितने ही अपने विधा के महान लोगों को यहाँ की कब्र में स्थान मिला है, यह कब्रिस्तान एक तरह से माना जाये तो कितने ही कला-संगीत प्रेमियों के लिये मक्का मदीना से कम नही है। यहाँ पर एक महिला का कब्र है जिसे भारतीय इतिहास या लखनऊ के इतिहास से करीब भुला ही दिया गया है, वह महिला करीब 1858 से यहीं पर दफ्न है। यह महिला अवध की आखिरी रानी है जो पेरिस में दफ्न है कुछ लोग उन्हे मल्लिका किश्वर के नाम से जानते थे तो कुछ अन्य उन्हें जानबू-ए अलियाह, नाम से जानते हैं ये अवध के शासक वाजीद अली शाह की माँ थी। 1856 में, जब अंग्रेजों ने लखनऊ पर अपना कब्जा कर नवाब से शासन छीना तो नवाब का पूरा परिवार अपनी सम्पत्ती ले कर कलकत्ता को कूच किया लेकिन जब वाजिद अली शाह ने अपने साम्राज्य को पुनः जीतने का दृढ संकल्प लिया। यह सब देख वाजिद अली की माँ और अवध की रानी ने यह निर्णय लिया कि वे इंग्लैंड जायेंगी और रानी विक्टोरिया से खुद ही बात करेंगी जैसा की दोनो रानियाँ हैं तो एक बेहतर समझ दोनो में बन सकता है। मल्लिका की तबियत में काफी गिरावट हुई जिसका प्रमुक कारण था मौसम का परिवर्तन। यह मिलन शुरू से ही बर्बाद हो गया था। इतिहासकार रोज़ी लेवेलिन-जोन्स के रिकॉर्ड से पता चलता है कि रानी विक्टोरिया, उनके "परिपत्र पोशाक" में, मल्लिका से अवध व अन्य विभिन्न विषयों पर बातचीत की जो की मुख्य विषय से काफी अलग था। उन्होंने नौकाओं के बारे में बात की और अंग्रेजी मकान, शाही विश्वासघाती और लखनऊ में अन्यायपूर्ण व्यापार के बारे में नहीं। ब्रिटिश संसद में, चीजें खराब हो गईं नकली नौकरशाही के आधार पर लंबे समय से तैयार एक प्रार्थना को बर्खास्त कर दिया गया था: बेगम ने "विनम्र याचिका" प्रस्तुत किया, वह शब्द जो सदन के समक्ष रखे गए दस्तावेज़ में उपयोग करने में विफल रहे। जबकि वहीं दूसरी तरफ उनके बेटे ने ब्रिटिश साम्राज्य को स्वीकार किया, मां लड़ाई में हठी थी। वे फिर लखनऊ लौटने की सोची पर उनके सामने यह शर्त रखी गयी कि अगर मलिकिका किश्वर और उसके जनसमूह पासपोर्ट चाहते हैं, तो उन्हें खुद को "ब्रिटिश स्वामित्व" घोषित करना होगा। बेगम ने "ब्रिटिश संरक्षण" के अधीन रहने के लिए कुछ भी ऐसा करने से इनकार कर दिया, जो सबसे अच्छा है, लेकिन किसी के भी "स्वामित्व" में नहीं। वहीं कानूनी विवादों को एक तरफ, 1857 के महान विद्रोह के मामले में गठबंधित किया गया- अब केवल ब्रिटिश शक्ति का अवध को छोड़ने का कोई मौका नहीं था, जब उस समय केवल एक ही कठोर शक्ति का प्रदर्शन करने के लिए बुलाया गया। अवध हमेशा के लिए खो गया था। 1858 में ज्वार निकला, बेगम ने आखिरी, पराजित और चरम पर नाखुश आने का फैसला किया। लेकिन पेरिस में वह बीमार हो गई और 24 जनवरी को नश्वर शरीर को छोड़ गयी। अंतिम संस्कार सरल था, लेकिन अभी तक कुछ सम्मान और तुर्की और फ़ारसी सुल्तानों के राज्य प्रतिनिधियों ने इस भारतीय रानी को यह सम्मान दिया था। कब्र के द्वारा पर एक सेनोटैप का निर्माण हुआ था, लेकिन यह लंबे समय से घट गया है - जब दशकों बाद अधिकारियों ने मकबरे की मरम्मत के लिए धन की मांग की थी, बेगम के निर्वासित पुत्र ने कलकत्ता से फैसला किया कि यह केवल उसकी पेंशन के लायक नहीं था, जबकि औपनिवेशिक राज्य एक कमजोर महिला का सम्मान करने के लिए भी कम ही इच्छुक था। और इसलिए, उस समय से ही शानदार स्मारकों से भरी एक कब्रिस्तान में, अवध की रानी दफ्न है, वहाँ एक पत्थर का एक टुकड़ा है, जो उसे मातम और अतिवृद्धि से बचाता है, जिसने अकेले ही उस पर दावा किया है और वह एक कहानी कहता है। इस प्रकार से आज भी वह कब्र वहीं कब्रिस्तान में एक सुस्त पड़े स्थान पर वह बेगम दबी पड़ी हैं। 1. http://www.livemint.com/Leisure/afqW5LAphHzX2Exy6yNbzM/Malika-Kishwar-A-forgotten-Indian-queen-in-Paris.html



RECENT POST

  • जीवित वृक्षों से आकृति बनाने की पद्धति जो है पर्यावरण के लिए अनुकूल
    पेड़, झाड़ियाँ, बेल व लतायें

     29-07-2021 09:36 AM


  • मनुष्य को सांसारिक चक्र से मुक्ति का मार्ग बतलाती है, विष्णु भक्त गजेंद्र की कथा
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     28-07-2021 10:15 AM


  • भारत में विलुप्‍त होती मगरमच्‍छ की प्रजातियाँ
    रेंगने वाले जीव

     27-07-2021 10:00 AM


  • हमारे देश में घर बनाया है लुप्तप्राय मिस्र गिद्ध ने
    पंछीयाँ

     26-07-2021 09:32 AM


  • इंजीनियरिंग का एक अद्भुत कारनामा है, कोलोसियम
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     25-07-2021 02:23 PM


  • आठ ओलंपिक स्वर्ण पदक के पश्चात अब लाना है फिर से भारतीय हॉकी को विश्व स्तर पर
    द्रिश्य 2- अभिनय कला य़ातायात और व्यायाम व व्यायामशाला

     24-07-2021 10:21 AM


  • मौन रहकर भी भावनाओं की अभिव्यक्ति करने की कला है माइम Mime
    द्रिश्य 2- अभिनय कला

     23-07-2021 10:11 AM


  • भारत में यहूदि‍यों का इतिहास और यहां की यहूदी–मुस्लिम एकता
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     22-07-2021 10:37 AM


  • पश्चिमी और भारतीय दर्शन के अनुसार भाषा का दर्शन तथा सीखने और विचार के साथ इसका संबंध
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     21-07-2021 09:40 AM


  • विश्व के इतिहास में सामाजिक समूहों के लिए गहरा महत्व रखता रहा है बलिदान
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     20-07-2021 10:20 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id