लखनऊ संग्रहालय में हैदर अली की पिछवाई

लखनऊ

 02-02-2018 11:14 AM
द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

पिछवाई यह कलाप्रकर राजस्थान से शुरू हुआ जिसे मथुरा के कलाकारों ने प्रसिद्ध किया। मान्यता है की पिछवाई कला की शुरवात दक्खन, औरंगाबाद और राजस्थान के राजसमंद से शुरू हुई थी। नाथद्वारा, राजसमंद पिछवाई कला के लिए जाना जाता है। पिछवाई का मतलब है पीछे से लटकाने वाला कुछ जिसमे पीछ का मतलब है पीछे और वाई का है लटकाना। यह चित्र प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल कर के बड़े सूती कपड़े पर बनाए जाते हैं। एक पिछवाई पर चार से ज्यादा लोग भी काम करते हैं। हर पिछवाई का एक विशेष नाम और भाव होता है तथा उसे बनाते वक़्त एक मौलिक पवित्र प्रतीकात्मक रूपांकन के तहत ही बनाया जाता है। पिछवाई एक धार्मिक चित्रकारी है तथा यह वल्लभ संप्रदाय से जुडी हुई है। पिछवाई में श्री कृष्ण मतलब श्रीनाथजी की कथाएं चित्रित की जाती हैं। इस में कलात्मकता साथ-साथ दूसरा उद्येश्य यह है की कोई अनपढ़ यक्ति भी इन चित्रों को देखकर श्रीकृष्ण की जीवनगाथा एवं लीलाओं को जान सके। सामान्य रूप से पिछवाई यह एक धार्मिक कला है लेकिन गुजरते काल की वजह हो सकता है की कभी कभी इसमें राजा महाराजाओं के तथा प्राकृतिक सौंदर्य का भी चित्रण होता हो। ऐसी ही एक पिछवाई, जिसका चित्र यहाँ पर दिया गया है, लखनऊ के राज्य संग्रहालय में मौजूद है। यह 19वी शताब्दी से है तथा राजस्थानी पिछवाई कला शाखा के हिसाब से बना हुआ है। इस पिछवई पर हैदर अली इस मध्यकालीन शासक के जिंदगी की कुछ घटनाएं चित्रित की गयी हैं। इस पिछवाई को मोटे तौर पर चार हिस्सों में बाटा गया है ताकि एक दिन की घटनाओं को एक प्रवाह में दिखाया जा सके। इसमें हैदर अली ईस्ट इंडिया कंपनी के ब्रिटिश अधिकारी एवं महारष्ट्र के पेशवा अधिकारीयों से बात करते हुआ दिखाया है। हो सकता है की ये चित्र इस वाकये का चित्रण हो जब हैदर अली ब्रिटिश-पेशवा ने साथ मिल उसके खिलाफ जो संगठन किया था उसको तोड़ने की कोशिश कर रहा था। ये चित्र बड़ा ही खुबसूरत तरीके से चित्रित किया है और बड़ी तफ़सीली से बनाया है जिसमे अंग्रेजों एवं पेशवाओं के कपड़े तथा पहनावे का अंदाज़ आदि चीजों पर भी ध्यान दिया गया है। 1. आरबीएस विसिटर्स गाइड इंडिया-राजस्थान: राजस्थान ट्रेवल गाइड: आशुतोष गोयल https://goo.gl/ShqihB 2. रिसर्च मोनोग्राफ सीरीज, इश्यूज 14-17 https://goo.gl/QhVg8t 3. https://en.wikipedia.org/wiki/Pichhwai 4. रेयर बूक सोसाइटी ऑफ़ इंडिया http://www.rarebooksocietyofindia.org/postDetail.php?id=196174216674_10150266609391675 5. http://gaatha.com/pichwai-paintings/



RECENT POST

  • मनुष्य को सांसारिक चक्र से मुक्ति का मार्ग बतलाती है, विष्णु भक्त गजेंद्र की कथा
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     28-07-2021 10:15 AM


  • भारत में विलुप्‍त होती मगरमच्‍छ की प्रजातियाँ
    रेंगने वाले जीव

     27-07-2021 10:00 AM


  • हमारे देश में घर बनाया है लुप्तप्राय मिस्र गिद्ध ने
    पंछीयाँ

     26-07-2021 09:32 AM


  • इंजीनियरिंग का एक अद्भुत कारनामा है, कोलोसियम
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     25-07-2021 02:23 PM


  • आठ ओलंपिक स्वर्ण पदक के पश्चात अब लाना है फिर से भारतीय हॉकी को विश्व स्तर पर
    द्रिश्य 2- अभिनय कला य़ातायात और व्यायाम व व्यायामशाला

     24-07-2021 10:21 AM


  • मौन रहकर भी भावनाओं की अभिव्यक्ति करने की कला है माइम Mime
    द्रिश्य 2- अभिनय कला

     23-07-2021 10:11 AM


  • भारत में यहूदि‍यों का इतिहास और यहां की यहूदी–मुस्लिम एकता
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     22-07-2021 10:37 AM


  • पश्चिमी और भारतीय दर्शन के अनुसार भाषा का दर्शन तथा सीखने और विचार के साथ इसका संबंध
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     21-07-2021 09:40 AM


  • विश्व के इतिहास में सामाजिक समूहों के लिए गहरा महत्व रखता रहा है बलिदान
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     20-07-2021 10:20 AM


  • शहर के मास्टर प्लान में शामिल किया जाना चाहिए मलिन बस्तियों का विकास
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     18-07-2021 06:09 PM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id