लखनऊ में अभियांत्रिकी

लखनऊ

 30-05-2017 01:32 PM
वास्तुकला 1 वाह्य भवन
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का ज्ञान होना किसी भी शहर या देश के विकास के लिये अत्यन्त महत्वपूर्ण होता है। इमारतों से लेकर दैनिक जीवन मे प्रयुक्त होने वाली समस्त वस्तुयें कहीं ना कहीं से विज्ञान व इसके आविष्कारों से जुड़ी होती हैं। आदि काल से ही इनसे जुड़े कई प्रकार के आविष्कार करते आ रहा हैं उदाहरणतः ओल्डवन हस्थ कुठार, अशूलियन हस्थ कुठार आदि। सनैः-सनैः प्रौद्योगिकी में सुधार से औजारों की गुणवत्ता मे सुधार आया तथा मानव अपने लिये भवनो आदि का निर्माण करने लगा। बलूचिस्तान के मेहरगढ़ व कश्मीर के बुर्ज़होम, जो कि नव पाषाणकाल से सम्बन्धित हैं, से प्राप्त साक्ष्यों से यह पता चलता है कि मानव ने भवन निर्माण कला मे एक विशिष्ट मुकाम हासिल कर लिया था। सिन्धु सभ्यता से सम्बन्धित पुरास्थलों व वहाँ से प्राप्त साक्ष्यों से भवन निर्माण कला व शहरीकरण के भी साक्ष्य मिलते हैं। धातुओं के ज्ञान ने जीवन को और भी सुगम व सुन्दर बनाने का कार्य किया। महरौली, दिल्ली, मे स्थित लौह स्तम्भ व अन्य पुरास्थलों से प्राप्त धातु के पुरासम्पदाओं से उन्हें धातु के उत्कृष्ट ज्ञान की प्राप्ति थी यह पता चलता है। मध्यकाल मे धातु व निर्माण कलाओं मे वृहद विकास हुआ जिनमे बहामनी सल्तनत द्वारा बनाये गये तोप व किले आदि प्रमुख हैं। परांदा किला प्रौद्योगिकी के लिये अत्यन्त महत्वपूर्ण सिद्ध हुआ है। लखनऊ का निर्माण 18वीं शताब्दी मे असफ-उद-दौला द्वारा कराया गया था। सुजा-उद-दौला जो कि एक कला प्रेमी व्यक्ति था, उसने लखनऊ शहर का निर्माण अत्यन्त ही विशिष्ट तरीके से करवाया। यहाँ पर अंग्रेजी वास्तुकला व अंग्रेजों के आगमन से कई अन्य प्रकार के भी भवनों का भी निर्माण हुआ। लॉ मार्टियनर कॉलेज अपने उत्कृष्ट बनावट व वास्तु के दृष्टिकोण से अत्यन्त महत्वपूर्ण है। लखनऊ मे गोमती नदी प्रवाहित है जिसको पार करने के लिये पुलों का निर्माण होना अत्यन्त आवश्यक था। इसी कड़ी मे यहाँ पर कई पुलों का निर्माण हुआ जिसमे लॉर्ड हार्डिंग ने सीतापुर सडक और लखनऊ को सम्पर्क मे लाने के लिये लाल पुल का निर्माण सन् 1911 मे करवाया था। जोसेफ एंड कम्पनी द्वारा बनवाया गया लोहा पुल यहाँ का प्राचीनतम पुल है जिसका निर्माण सन् 1815-1840 के मध्य यहाँ के नवाब कि आज्ञा पर करवाया गया था। उपरोक्त बिन्दुओं के आधार पर यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहाँ पर प्रौद्योगिकी अत्यन्त ही उत्कृष्ट थी| 1. राइज़ ऑफ सिविलाइजेशन इन इण्डिया एण्ड पाकिस्तान: एलचिन 2. मार्ग, लखनऊ- देन एंड नाउ, संस्करण 55-1, 2003

RECENT POST

  • उत्तर प्रदेश में पाये गये हैं सबसे अधिक उत्खनन स्थल
    खदान

     17-07-2019 01:45 PM


  • जब मिले सुकरात एक भारतीय योगी से
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     16-07-2019 02:20 PM


  • सामाजिक उत्थान और एकता का प्रतीक है लखनऊ स्थित अंबेडकर पार्क
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     15-07-2019 12:52 PM


  • शास्त्रीय संगीत में लखनऊ की विधा – ठुमरी
    ध्वनि 1- स्पन्दन से ध्वनि

     14-07-2019 09:00 AM


  • भारतीय और पाश्‍चात्‍य तर्कशास्‍त्र एवं उनके बीच भेद
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     13-07-2019 12:05 PM


  • ग़दर के समय लखनऊ में स्थित ब्रिटिश महिलाओं की स्थिति का वर्णन करती एक पेंटिंग
    द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

     12-07-2019 01:02 PM


  • लखनऊ के आसपास स्थि‍त बड़हल के वृक्ष के उपयोग और फायदे
    पेड़, झाड़ियाँ, बेल व लतायें

     11-07-2019 12:54 PM


  • जीवन के लिये अनमोल है पानी
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     10-07-2019 01:13 PM


  • बेहतर भविष्‍य के लिए सहायक हैं यह अल्‍पकालिक कोर्स
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     09-07-2019 12:24 PM


  • पपीते में बढ़ता रिंग्सपॉट वायरस का प्रभाव
    साग-सब्जियाँ

     08-07-2019 11:33 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.