'इलाहबाद का कसाई' लखनऊ में

लखनऊ

 03-03-2018 11:15 AM
उपनिवेश व विश्वयुद्ध 1780 ईस्वी से 1947 ईस्वी तक

आज़ादी शब्द सुनने में अत्यधिक आनन्द देता है परन्तु आज़ादी पाने के लिये कितने ही वीर सपूतों का रक्तपात हुआ था। अंग्रेजों द्वारा दमनकारी शासन के दौरान, कई भारतीयों ने अपनी जान गंवा दी। जलियावाला बाग नरसंहार को कौन भूल सकता है। यह अब तक की सबसे भयावह रक्तपात की दास्ताँ हैं। इसका कर्ता-धर्ता जनरल रेजिनाल्ड डायर था पर यह नहीं भूलना चाहिये कि उसी की तरह एक और क्रूर आततायी जेम्स नील था जिसने 1857 के भारतीय विद्रोह को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी। लखनऊ की घेराबंदी के दौरान उन्हें मार दिया गया था और भारतीयों द्वारा ‘Butcher of Allahabad’ के नाम से बुलाया गया था अर्थात ‘इलाहबाद का कसाई’। बहुत से भारतीय ब्रिटिश सेना के इस अधिकारी से अवगत नहीं हैं जो कि सिपाही विद्रोह के दौरान हजारों भारतीयों की हत्या के पीछे था और उसने ऐसे बड़े पैमाने पर वध करने के बाद जीत दर्ज की।

डेलरी, स्कॉटलैंड के पास पैदा हुआ और ग्लासगो विश्वविद्यालय में पढ़ा नील, 1827 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेवा में शामिल हुआ। 1828 से 1852 तक वह मद्रास यूनानियों के साथ था और 1852 में उसने सफलतापूर्वक सैन्य कर्तव्य का बर्मी युद्ध और बाद में क्रिमेनियन युद्ध लड़ा और उसके बाद 1857 में वह ई.आई.सी. सैन्य के साथ अपने कर्तव्य को फिर से शुरू करने के लिए भारत लौट आया।

उसके आगमन के छह सप्ताह बाद, उत्तर भारत के कई राज्य ब्रिटिश शासन के खिलाफ विद्रोह की फिराक में थे। भारत के उत्तरी राज्यों में हिंसा और विद्रोह की कुछ छिटपुट घटनाएं थीं। यह सब मेरठ के छावनी से शुरू हुआ। 1857 की क्रान्ती के दौरान ब्रिगेडियर जनरल नील अपनी रेजिमेंट के साथ मद्रास से बनारस (वाराणसी) गए और 3 जून 1857 को अपने आने पर, उन्होंने पूर्व देशी स्थानीय रेजिमेंट को तोड़ दिया, जिसमें मुख्य रूप से वाराणसी में तैनात सिख शामिल थे। सिखों और अन्य ने विद्रोह किया जिसपर नील के कमांडरों ने उनपर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। इलाहाबाद में कई यूरोपीय लोग एक किले में विद्रोहियों के खिलाफ लड़ रहे थे। जनरल नील 9 जून को इलाहाबाद पहुंचा और तुरंत उन विद्रोहियों को बिना किसी जाँच के फांसी देने का आदेश दिया। अपने अधिकारियों में से एक ने आलोचनात्मक टिप्पणी की, जिसमें कहा गया कि नील ने अपने सैनिकों को बिना किसी जांच के मार दिया और उनके घरों में आग लगा दी। उसने एक पूरे गाँव के लोगों को आग लगा दी जिसमें सभी लोग जल कर मर गये। सचमुच, एक आदमी के रोष के कारण पूरे छोटे शांत गांव का सफाया हो गया था। ब्रिगेडियर जनरल नील द्वारा किये गए इस हत्याकांड ने पूरे भारत और अन्य देशों में भारतीयों को आश्चर्यचकित कर दिया। जौनपुर में सिख बलों ने इन नरसंहारों पर हिंसक विरोध किया। जनरल नील और उसकी सेना ने, 6 जून से 15 जून तक, विरोधियों और मूल निवासी के खिलाफ किसी भी राहत के बिना हिंसक रूप से काम किया और उन्होंने युद्ध हर नियम का उल्लंघन किया। ब्रिटिश उच्च-पदधिकारियों ने उसे अपनी देशभक्ति के लिए विशेष नियुक्ति के साथ पुरस्कृत किया। जनरल नील ने एक उच्च सैन्य अधिकारी के रूप में अपनी क्षमता का भरपूर दुरुपयोग किया और व्यक्तिगत तौर पर बहुत से कैदियों को अपनी नाक के नीचे मार डाला।

नील के आतंक व बर्बरता की कहानी मात्र इलाहाबाद या बनारस तक नहीं सीमित थी अपितु कानपुर, बिठूर आदि स्थानों पर भी उसने कत्ले आम किया था।

वे कानपुर से लखनऊ तक जाने के लिये 18 सितंबर को शुरू हुए और 25वें दिन उन्होंने लखनऊ पर अपने बड़े हमले का नेतृत्व किया। इस लड़ाई में लखनऊ के खास बाजार में 25 सितंबर 1857 को नील की मौत हो गई। उसके सिर में गोलीबारी हुई थी।

लखनऊ में 'नील लाइन' के नाम से स्मारक बनाए गए। रेजिडेंसी में लगे स्मारक पर लिखा है है: "रानी के एडीसी, ब्रिगेडियर जनरल जे.जी.एस. नील को याद करने के लिए पवित्र अंडमान में एक द्वीप नामित किया गया"। वर्तमान में लखनऊ में एक गेट नील द्वार नाम से जाना जाता है जिसका चित्र प्रस्तुत किया गया है।

1- http://www.deccanherald.com/content/99637/butcher-allahabad-lies-museum-attic.html
2. http://navrangindia.blogspot.in/2016/08/james-george-smith-neill-butcher-of.html



RECENT POST

  • भारत के कंटीले जंगल
    जंगल

     04-07-2020 03:14 PM


  • ऐरावत अदम्य शक्ति का प्रतीक और हाथियों का देवता राजा
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     03-07-2020 11:06 AM


  • मुगल आभूषण और कपड़ों का निरूपण और इतिहास
    द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

     01-07-2020 11:51 AM


  • लखनऊ की कई जटिल सुगंध
    गंध- ख़ुशबू व इत्र

     01-07-2020 01:17 PM


  • कितना लाभदायक साबित होगा अंतरिक्ष में खनन
    खनिज

     30-06-2020 06:50 PM


  • भारतीय आदिवासी गहनों में हैं, संस्कृति और परंपरा का सम्मोहन
    म्रिदभाण्ड से काँच व आभूषण

     29-06-2020 10:50 AM


  • एक गीत, जिससे प्रेरित होकर की गयी तमिल और हिंदी गीतों की रचना
    ध्वनि 1- स्पन्दन से ध्वनि

     28-06-2020 12:20 PM


  • दुनिया में सबसे अनोखी हैं, अवधी खाने को पकाने की तकनीकें
    स्वाद- खाद्य का इतिहास

     27-06-2020 09:40 AM


  • अन्य जानवरों से अलग मानव मस्तिष्क को क्या निर्धारित करता है?
    व्यवहारिक

     26-06-2020 09:40 AM


  • क्या आधुनिक मिक्सर ग्राइंडर से अच्छा विकल्प है, प्राचीन सिल-बट्टा
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     25-06-2020 01:40 PM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.